डॉ वेदप्रताप वैदिक का परिचय

जन्म : 30 दिसंबर, 1944, इंदौर

वृत्ति : संपादकीय निदेशक, ‘नेटजाल.कॉम‘ (भारतीय भाषाओं का महापोर्टल)

तथा लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन.

शिक्षा : (1) पीएच.डी (अंतरराष्ट्रीय राजनीति), स्कूल ऑफ

इंटरनेशनल स्टडीज, जवाहरलाल नेहरु वि.वि., 1971.

विषय अफगानिस्तान के साथ सोवियत संघ और अमेरिका

के संबंधों का तुलनात्मक अध्ययन, 1946-1963″ (पीएच.डी.

शोध-कार्य के दौरान न्यूयार्क के कोलम्बिया विश्वविद्यालय, वाशिंगटन डी. सी. की लायब्रेरी ऑफ कांग्रेस, मास्को की विज्ञान अकादमी, लंदन के प्राच्य-विद्या संस्थान तथा काबुल विश्वविद्यालय में विशेष अध्ययन का अवसर)

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के शोधग्रंथ को अपनी मातृभाषा, हिन्दी, में लिखने का आग्रह, शोध-संस्थान से निष्कासन, सारे देश में रोष की लहर, इस प्रश्न पर सर्वश्री डॉ. राममनोहर लोहिया, आचार्य कृपालानी, अटलबिहारी वाजपेयी, चंद्रशेखर, जॉर्ज फर्नांडिस, भागवत झा आजाद, मधु लिमये, रवि राय, राजनारायण, सिद्घेश्वर प्रसाद, हेम बरूआ, के. उमानाथ, किशन पटनायक, प्रकाशवीर शास्त्र्ी, हीरेन मुखर्जी आदि ने दो साल तक (1966-67) संसद को हिलाये रखा.

श्रीमती इंदिरा गांधी, डॉ. ज़ाकिर हुसैन, डॉ. संपूर्णानंद, पं0 दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. त्र्िगुण सेन, रामधारीसिंह दिनकर, डॉ. हरिवंशराय बच्चन तथा डॉ. धर्मवीर भारती जैसे मनीषियों द्वारा विशेष प्रोत्साहन. लगभग सभी राजनैतिक दलों के सहयोग से भाषाई संघर्ष में ऐतिहासिक विजय. इस संघर्ष के कारण हिंदी के साथ-साथ समस्त भारतीय भाषाओं को पहली बार यह मान्यता मिली की वे पीएच. डी. शोधग्रंथों का माध्यम बन सकेंगी.

(2) एम.ए. (राजनीति शास्त्र्), प्रथम श्रेणी

इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज, इंदौर विश्वविद्यालय, 1965

(3) बी.ए. (राजनीति शास्त्र्, दर्शनशास्त्र्, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी) प्रथम श्रेणी

विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन, 1963

(4) संस्कृत (सातवलेकर परीक्षाएं),1955 प्रथम श्रेणी

(5) रूसी भाषा (स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज),1967 प्रथम श्रेणी

(6) फारसी भाषा (स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज), 1968 प्रथम श्रेणी

छात्र्वृत्तियां :  (1) राष्ट्रीय प्रतिभा छात्र्वृत्ति, 1963-64.

एवं (2) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग शोधवृत्ति, 1964-1966

शोधवृत्तियां (3) वरिष्ठ शोधवृत्ति, इंडियन कॉसिल ऑफ सोश्यल साइंस रिसर्च,

1981-1983

इंस्टीट्रयूट फॉर डिफेंस स्टडीज एण्ड एनालिससतथा स्कूल ऑफ

इंटरनेशनल स्टडीज‘ (ज.नेहरू.वि.वि.) में दो साल तक सीनियर फेलोके तौर पर शोधकार्य.

अध्यापन : हस्तिनापुर कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) में राजनीति शास्त्र् का

अध्यापन, 1970-74. पिछले 30 वर्षों में अनेक भारतीय एवं विदेशी विश्वविद्यालयों में अन्तरराष्ट्रीय राजनीति एवं पत्र्कारिता पर अल्पकालिक अध्यापन-कार्यक्रम चलाते रहे|

पुस्तकें :   (1) हिन्दी पत्र्कारिता : विविध आयाम‘, संपादित (नेशनल, 1976),पाँच

संस्करण (हिन्दी बुक सेंटर), हिन्दी पत्र्कारिता के इतिहास, कला और अधुनातन प्रवृत्तियों का विवेचन करने वाले इस ग्रंथ को समीक्षकों ने हिन्दी पत्र्कारिता का विश्वकोषकहा है. लगभग सभी विश्वविद्यालयों में इसका संदर्भ ग्रंथ के तौर पर उपयोग किया जाता है. इसके कई संस्करण हो चुके हैं,

(2) अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा (नेशनल पब्लिशिंग हाउस, 1973).

अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर हिंदी का यह पहला शोधग्रंथ है, विद्वान समीक्षकों ने इसे अपने विषय का प्रामाणिकऔर मौलिकसंदर्भ ग्रंथ कहा है. यह फारसी, रूसी और अंग्रेजी स्रोतों के आधार पर लिखा गया है. इस ग्रंथ पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं.

(3) ‘भारतीय विदेश नीति : नये दिशा संकेत (नेशनल, 1971)

इस गं्रथ को समीक्षकों ने मौलिक चिंतन और भविष्य दृष्टिका उल्लेखनीय दस्तावेज घोषित किया है|

(4) एथनिक क्राइसिस इन श्रीलंका : इंडियाज़ ऑप्शंस (नेशनल, 1985).

श्रीलंका की तमिल समस्या पर किसी भारतीय द्वारा लिखा गया यह पहला गं्रथ है.

(5) अफगानिस्तान : कल, आज और कल (राजकमल प्रकाशन, 2002).

अफगानिस्तान के इतिहास, समाज और राजनीति पर इस तरह का गवेषणात्मक और मौलिक व्याख्यासम्पन्न ग्रंथ दुनिया की किसी भी अन्य भाषा में उपलब्ध नहीं है.

(6) वर्तमान भारत (राजकमल प्रकाशन, 2002).

समसामयिक भारत की राजनीति पर लिखे गए विश्लेषणात्मक निबंधों का संग्रह !

(7) महाशक्ति भारत (राजकमल प्रकाशन, 2002).

इस गं्रथ में भारत को महाशक्ति बनाने का स्वप्न देखा गया है और उस स्वप्न को साकार करने के उपायों पर विचार किया गया है|

(8) अंग्रेजी हटाओ : क्यों और कैसे ? (प्रभात प्रकाशन, दिल्ली प्रथम संस्करण 1973, सातवां संस्करण, 1998)

इस पुस्तक की 75 हजार प्रतियां बिक चुकी हैं और इसका मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, संस्कृत, गुजराती, मराठी, बांग्ला, असमिया, पंजाबी,उर्दू, सिंधी, मणिपुरी, कश्मीरी, कोंकणी तथा ओडि़या आदि में अनुवाद हो चुका है.

(9) हिंदी का सम्पूर्ण समाचार-पत्र् कैसा हो ? (प्रवीण प्रकाशन, 1994), तीन संस्करण.

(10)’कुछ महापुरूष और कुछ मित्र् शीघ्र प्रकाश्य

(11) मोरिशस, मध्य एशिया और चीन के तीन यात्र-वृतांत प्रकाशनाधीन

पत्र्कारिता : (1) 1958 में प्रूफ रीडर के तौर पर पत्र्कारिता में प्रवेश. तब से अब तक लगभग 1000 लेख, दर्जनों शोधपत्र्, लगभग दो हजार संपादकीय तथा सैकड़ों समीक्षाएं प्रकाशित. पिछले तीन दशकों में नई दुनिया‘, ‘नवभारत टाइम्स‘, ‘हिंदुस्तान‘, ‘जनसत्ता‘, ‘भास्कर‘, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया‘, ‘धर्मयुग‘, ‘दिनमान‘, ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान‘, ‘इंटरनेशनल स्टडीज‘, ‘स्ट्रटेजिक एनालिसिस‘, ‘वर्ल्ड फोकसआदि पत्र्-पत्र्िकाओं में निरंतर लेख और भंेट वार्ताएं.

अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान, श्रीलंका, चेकोस्लोवाकिया, सूरिनाम आदि राष्ट्रों के शीर्ष नेताओं से की गई भेंट-वार्ताओं को अंतरराष्ट्रीय ख्याति.

फिलहाल, देश के लगभग दर्जन भर अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन.

(2) संपादक, ‘पी.टी.आई.-भाषा‘, 1986-96

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा स्थापित भाषानामक हिंदी की समाचार समिति के संस्थापक-संपादक. भाषाने अपनी नवीन खबर-शैली, देशी और विदेशी नामों के मानकीकरण और अनेक महत्त्वपूर्ण अवसरों पर अपने स्कूपोंद्वारा हिंदी पत्र्कारिता के क्षेत्र् में उल्लेखनीय ख्याति अर्जित की.

(3) संपादक (विचार), नवभारत टाइम्स, 1986. सहायक संपादक, नवभारत टाइम्स 1974-85, संपादक, ‘अग्रवाही (मासिक), इंदौर, 1962-66. संपादक, इंदौर क्रिश्यिचन कॉलेज पत्र्िका, 1963-64. हिंदी पत्र्कारिता : विविध आयमनामक 1100 पृष्ठों के महग्रंथ का संपादन, 1976.

(4) निदेशक, हिंदुस्तान समाचार, 1974-77

(5) संपादकीय निदेशक, नेटजाल.कॉम (भारतीय भाषाओं का महापोर्टल)

वक्तृत्व : छात्र् जीवन में वक्तृत्व के अनेक अखिल भारतीय पुरस्कार. किशोर-वय से ही विशाल जन-सभाओं को संबोधित करने का अभ्यास. अनेक भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों द्वारा विशेष व्याख्यानों के लिए आमंत्र्ित. अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में अनेक बार भारत का प्रतिनिधित्व. भारतीय आकाशवाणी और दूरदर्शन पर 1962 से अब तक सैकड़ों कार्यक्रम. बी.बी.सी., वॉइस ऑफ अमेरिका तथा कई यूरोपीय और एशियाई रेडियो और टी.वी. चैनलों पर साक्षात्कार !

संयुक्तराष्ट्र संघ में भारतीय प्रतिनिधि मंडल के सदस्य के नाते तीन व्याख्यान, 1999.

विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दक्षिण एशियाई विश्व-सम्मेलन में उद्रघाटन-भाषण, 1999.

विदेश यात्रएं : अमेरिका, सोवियत संघ, बि्रटेन, फ्रांस, चीन, केनाडा, चेकोस्लोवाकिया, जर्मनी, स्विटज़रलैंड, आस्टि्रया, पोलैंड, लेबनान, इटली, तुर्की, एराक, ईरान, संयुक्त अरब अमारात, अफगानिस्तान, श्रीलंका, पाकिस्तान, बर्मा, नेपाल, थाईलैंड, बांग्लादेश, मोरिशस, सिंगापुर, जापान, कोरिया, हांगकांग, सूरिनाम, त्र्िनिदाद मध्य-एशिया के मुस्लिम गणतंत्र् आदि देशों की यात्रएं अनेक बार. भारत के लगभग सभी राज्यों की यात्र.

(1) सोवियत विज्ञान अकादमी के इंस्तीतूते नरोदोफ आज़ी आफ्रीकीमें शोध व्याख्यानवृत्ति, 1969.

(2) काबुल विश्वविद्यालय और अफगान विदेश मंत्रलय के अतिथि के तौर पर अफगानिस्तान-यात्र, 1972

(3) अफगान सरकार के अतिथि के तौर पर 1978, 1981 तथा 1988 में अफगानिस्तान यात्र.

(4) विस्कॉन्सिन वि.वि. (अमेरिका) द्वारा अफगानिस्तान संबंधी विश्व संगोष्ठी में विशेष व्याख्यानवृत्ति, 1984.

(5) अमेरिका सरकार द्वारा वी.आई.पी. विजिटर्सकार्यक्रम के अंतर्गत विदेश नीतिसंबंधी मामलों पर यात्र एवं व्याख्यानवृत्ति, 1988.

(6) मोरिशस के महात्मा गांधी संस्थानद्वारा आयोजित पत्र्कारिता शिविर में तीन विशेष व्याख्यान, 1992.

(7) विश्व हिंदी सम्मेलन, मोरिशस में भारतीय प्रतिनिधि, 1994.

(8) अंतराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन, सूरिनाम में भारतीय प्रतिनिधि, 1993.

(9) भूटान-नरेश के निमंत्र्ण पर भूटान-यात्र, 1993.

(10)चीनी पत्र्कार संघ के विशिष्ट अतिथिके तौर पर चीन की विस्तृत यात्र और अनेक व्याख्यान, 1995.

(11)मध्य एशिया के गणतंत्रें तथ अन्य संबद्घ देशों की सघन यात्र, 1995.

(12)’इंडिपेंडेंट प्लानिंग कमीशनके मेहमान के तौर पर लाहौर प्रेस क्लबमें भाषण तथा पाकिस्तानी नेताओं से विचार-विनिमय 1994 तथा 1995. पहले और बाद में भी अनेक यात्रएं !

(13) मोरिशस के प्रधानमंत्र्ी के अतिथि के तौर पर मोरिशस-प्रवास एवं व्याख्यान, 1996.

(14) संयुक्तराष्ट्र संघ में भारतीय प्रतिनिधि मंडल के सदस्य के तौर पर 1999 में अमेरिका-यात्र| लगभग 40 शहरों और दर्जनों विश्वविद्यालयों में व्याख्यान. अंतरराष्ट्रीय अफगान शांति सम्मेलन का उद्रघाटन.

(15) राष्ट्रपति नारायण जी के साथ मोरिशस यात्र, 2001.

(16) ईरान के विदेश मंत्रलय के निमंत्र्ण पर ईरानी राजनीति शोध-संस्थान में अफगानिस्तान पर व्याख्यान, 2002.

(17) प्रवासी भारतीय संस्थाओं के निमंत्र्ण पर अमेरिका तथा अरब देशों में प्रवास एवं व्याख्यान, 2002.

(19) पड़ौसी देशों के राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्र्ियों तथा प्रतिपक्ष के नेताओं से अनौपचारिक कूटनीतिक मंत्र्णाके लिए पिछले पच्चीस वर्षों में अगणित विदेश यात्रएं.

सम्मान : (1) हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा पत्र्कारिता के लिए इक्कीस हजार रूपये की

एवं सम्मान राशि, 1990.

पुरस्कार (2) मधुवन (भोपाल) द्वारा पत्र्कारिता में श्रेष्ठ कला आचार्यकी उपाधि से सम्मानित, 1989.

(3) उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा हिंदी सेवा के लिए पुरूषोत्तमदास टण्डनस्वर्ण पदक, 1988.

(4) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धाग्रंथ पर गोविंदवल्लभ पंत पुरस्कार, 1976.

(5) काबुल वि.वि. द्वारा अफगानिस्तान संबंधी शोधगं्रथ पर दस हजार रूपये की सम्मान राशि, 1972.

(6) इंडियन कल्चरल सोसायटी द्वारा लाला लाजपतराय सम्मान‘, 1992.

(7) मीडिया इंडिया सम्मान, नई दिल्ली, 1992.

(8) डॉ. राममनोहर लोहिया सम्मान, कानपुर, 1990.

(9) प्रधानमंत्र्ी द्वारा प्रदत्त रामधारीसिंह दिनकर शिखर सम्मान, 1992.

(10) छात्र्काल में राजनीतिशास्त्र्, दर्शन और हिंदी में सर्वोच्च अंक पाने पर कई बार स्पेशल मेरिट सर्टिफिकेट‘.

संस्थाएं एवं : अध्यक्ष, भारतीय विदेश नीति परिषद्र. संयोजक, भारतीय भाषा सम्मेलन,

संगठन 1996 से. संयोजक, अफगानिस्तान शांति समिति, 1989. सदस्य, सेटरडे लंच ग्रुप, 1989. सदस्य, निदेशक-मण्डल, ‘हिन्दुस्तान समाचार‘, 1975-77, सदस्य, हरियाणा साहित्य अकादमी, 1978-79. मंत्र्ी, हिंदी पत्र्कारिता समिति, 1974-80. मंत्र्ी, दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन, 1970-71. अध्यक्ष, दर्शन परिषद्र, इंदौर, 1961-63. अध्यक्ष, राजनीतिशास्त्र् परिषद्र, इंदौर, 1963-64. अध्यक्ष, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज छात्रवास संघ, 1966-67. भारत सरकार की अनेक सलाहकार समितियों के सदस्य.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विशेषज्ञ की हैसियत से अनेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों. प्रधानमंत्र्ियों और विदेशमंत्र्ियों से व्यक्तिगत परिचय. अफगानिस्तान के लगभग सभी शीर्षस्थ नेताओं तथा पेशावर स्थित मुजाहिदीन नेताओं से सुदीर्घ परिचय और संवाद. अफगानिस्तान में शांति-स्थापना का विशेष प्रयास. फीजी, मोरिशस, त्र्िनिदाद, सूरिनाम और खाड़ी-देशों के भारतवंशियों के लिए सक्रिय सांस्कृतिक-सामाजिक कार्य. संसार भर की हिन्दी संस्थाओं और हिन्दी विद्वानों से सतत संपर्क| हिंदी को विश्व भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए कृतसंकल्प !

निवास : ए-19, प्रेस एनक्लेव, नई दिल्ली-110 017.

फोन- 2686-7700, 2651-7295

कार्या. : एफ-36, हौजरानी, मोदी हॉस्पीटल के सामने, नई दिल्ली
फोन नं. 2667 5757, 2667 4040

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