दैनिक भास्कर, 17 अप्रैल 2013 : सारे देश में यह माना जा रहा है कि जनता दल (यू) ने नरेंद्र मोदी के विरुद्घ शंखनाद कर दिया है| यदि भाजपा नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर देगी तो यह गठबंधन टूट जाएगा| यह सोच सतही है और तर्क की तुला पर खरा नहीं उतरता| सबसे पहला प्रश्न [...]
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दैनिक भास्कर, 8 अगस्त 2012: जन-आंदोलन की दो पटरियों में से एक पटरी बिल्कुल उखड़ गई है। एक बाबा रामदेव की पटरी और दूसरी थी अन्ना हजारे की पटरी। अन्ना हजारे को हमारे कुछ पत्रकार भाई गांधीवादी कहते नहीं थकते, लेकिन बेचारे अन्ना ने अपने ताजा फैसले से गांधी को शीर्षासन करवा दिया। आजादी के [...]
Rashtriya Sahara, 13 Oct 2011 : लालकृष्ण आडवाणी की रथ-यात्रा को लेकर पता नहीं कौन-कौन परेशान हो रहा है? क्या कांग्रेस, क्या संघ-भाजपा, क्या कुछ मुस्लिम नेता और क्या कुछ क्षेत्रीय नेता ! सभी मिलकर 83 साल के इस चिर-युवा नेता की टांग-खिंचाई कर रहे हैं। इन परेशान होनेवाले महानुभावों से कोई पूछे कि भ्रष्टाचार-विरोधी [...]
Dainik Bhaskar, 12 Oct 2011: अन्ना टीम के लोगों ने जब से हिसार पर मुंह खोलना शुरू किया है, कई तात्कालिक और मूलभूत सवाल उठ खड़े हुए हैं। जैसे यह कि हिसार के उप-चुनावी दंगल में सीधे कूदकर क्या उन्होंने ठीक किया और यह मूलभूत प्रश्न भी कि क्या यह आंदोलन सिर्फ कागजी पुलाव बनकर [...]
Naya India, 04 Oct 2011 : भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में से क्या निकला, यह बताना भाजपा के नेताओं के लिए भी मुश्किल है। देश को आशा थी कि यह दिल्ली बैठक बड़ी जानदार सिद्ध होगी लेकिन वह होती, उसके पहले ही उसका दम निकल गया। बैठक के आरंभ से अंत तक नरेंद्र मोदी उस [...]
नई दिल्ली, 4 अक्तूबर| बिहार के मुख्यमंत्री और विलक्षण सांसद श्री भागवत झा आजाद के निधन पर डॉ. वेदप्रताप वैदिक ने गहरा शोक व्यक्त किया है| श्री आजाद पिछले लगभग 50 साल से डॉ. वैदिक के अभिभावक (गार्जियन) थे| 45 साल पहले जब वैदिक ने अपने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के शोधग्रंथ को हिंदी में लिखने का [...]
Naya India, 29 sept 2011 : फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कबूतरों के पिंजरे में बिल्ली छोड़ दी है। उन्होंने वह काम कर दिखाया है, जो यासर अराफात जैसे चमत्कारी नेता भी नहीं कर सके। अब्बास ने संयुक्तराष्ट्र महासचिव बान-की-मून को एक औपचारिक अर्जी दे दी है और फलस्तीन को पूर्ण सदस्य बनाने का [...]
Naya India, 30 Sept 2011 : अमेरिका और पाकिस्तान का एक-दूसरे से जैसा मोह-भंग आजकल हुआ है, पहले कभी नहीं हुआ। सीटो और सेन्टो नामक सैन्य-गुटों में शामिल होने के बाद दोनों देशों के संबंधों में कई बार छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव तो आए लेकिन इस बार झटका इतना तगड़ा है कि दोनों का गठबंधन टूट सकता [...]
नया इंडिया, 25 Sept 2011 : अगर किसी की गरीबी तय करने का पैमाना सिर्फ यही है कि वह रोज़ाना कितना खर्च करता है तो हमारे देश में सबसे ज्यादा गरीब तो नेता लोग ही होंगे, क्योंकि उन्हें तो कुछ खर्च करना ही नहीं पड़ता है। माले-मुफ्त और दिले-बेरहम! उन्हें हर चीज़ लगभग मुफ्त मिलती है। [...]
Naya India, 23 Sept 2003 : अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति प्रो. बुरहानुद्दीन रब्बानी की हत्या से अफगानिस्तान में चल रहे शांति-प्रयासों को गहरा धक्का लगेगा| वे अफगानिस्तान के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे| वे सिर्फ राष्ट्रपति ही नहीं रहे, उन्होंने लगभग 20 साल तक मुजाहिदीन-संघर्ष का भी नेतृत्व किया था| वे पठान नहीं [...]
Rabbani Condoled by Vaidik New Delhi, 21 Sept : Dr. V.P. Vaidik, Chairman, Council for Indian Foreign Policy has expressed his deep shock on the assassination of the Former President of Afghanistan, Prof. Burhanuddin Rabbani in Kabul. He has conveyed his sincere condolences to Prof. Rabbani’s son, Ambassador Sulahuddin. Prof. Rabbani’s assassination is [...]
नया इंडिया, 17 सितंबर 2011 : नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी, दोनों को अमेरिकी विशेषज्ञ एक ही डंडे से हांक रहे हैं| दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है| दोनों को वे अभी से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर रहे हैं| मानो कि जैसे यह चुनाव अमेरिका के राष्ट्रपति का हो, न कि भारत के [...]
14 Sept 2011 : संयुक्तराष्ट्र संघ में अगर अब भी हिंदी नहीं आएगी तो कब आएगी ? हिंदी का समय तो आ चुका है लेकिन अभी उसे एक हल्के-से धक्के की जरूरत है| भारत सरकार को कोई लंबा चौड़ा खर्च नहीं करना है, उसे किसी विश्व अदालत में हिंदी का मुकदमा नहीं लड़ना है, कोई [...]
नया इंडिया, 14 सितंबर 2011 : एहसान जाफरी के मामले में उच्चतम न्यायालय ने जो निर्णय किया है, उस पर कांग्रेस और भाजपा दोनों की प्रतिकि्रया सही मालूम पड़ती हैं| कांग्रेस का यह कहना सही है कि उच्चतम न्यायालय ने नरेन्द्र मोदी और उनके साथियों को दोषमुक्त घोषित नहीं किया है| अब सारे मामले पर [...]
Dainik Bhaskar, 14 Sept. 2011 : संयुक्तराष्ट्र संघ में अगर अब भी हिंदी नहीं आएगी तो कब आएगी ? हिंदी का समय तो आ चुका है लेकिन अभी उसे एक हल्के-से धक्के की जरूरत है| भारत सरकार को कोई लंबा चौड़ा खर्च नहीं करना है, उसे किसी विश्व अदालत में हिंदी का मुकदमा नहीं लड़ना [...]
10 सितंबर 2011 : 11 सितंबर एक तारीख है लेकिन यह दुनिया में वैसे ही प्रसिद्घ हो गई है, जैसे 25 दिसंबर या 1 जनवरी! 11 सितंबर का मतलब वह दिन है, जब न्यूयार्क के ट्रेड टॉवर और वाशिंगटन के पेन्टेगॉन-भवन पर हवाई हमला हुआ था| इस हमले को हुए दस साल हो गए| इन [...]
नया इंडिया, 9 सितंबर 2011 : अंतरराष्ट्रीय राजनीति के इतिहास में भारत और बांग्लादेश के संबंध एकदम अनूठे रहे हैं| दुनिया में ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं जबकि कोई राष्ट्र अपने पड़ौस में एक नए राष्ट्र को जन्म दे दे और उस पर कोई अहसान नहीं जताए या उसके साथ दादागीरी न करे| बांग्लादेश [...]
दिल्ली उच्च न्यायालय के पास हुए विस्फोट ने एक बार फिर भारत की दुखती रग पर उंगली रख दी है| संसद या उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय कोई साधारण बाजार या भीड़भरे रेल्वे स्टेशन नहीं हैं| ये भारतीय राष्ट्र-राज्य के स्नायु-केंद्र हैं| अगर इन स्थानों की रक्षा करने में भी हम असमर्थ हैं तो भारत [...]
Dainik Bhaskar, 07 Sept. 2011 : इधर रामलीला मैदान में अन्ना हजारे का अनशन अंतिम दौर में था, उधर कांग्रेस पार्टी ने गुजरात में नहले पर दहला मारने की कोशिश की। उसने वहां नए लोकायुक्त की नियुक्ति करवा दी। अन्ना हजारे को उसने संदेश दिया कि तुम तो सिर्फ बात करते हो, लोकपाल और लोकायुक्त [...]
ओम पुरी और किरन बेदी के प्रहारों से कुछ सांसदों का आहत होना स्वाभाविक है। यदि वे बिल्कुल भी आहत नहीं होते तो क्या होता ? उनकी जितनी इज्जत बची हुई है, वह भी पैंदे में बैठ जाती। अन्ना के आंदोलन ने हमारे सभी दलों के नेताओं को इतना अप्रासंगिक बना दिया था कि वे [...]