राष्ट्रीय सहारा, 19 मई 2011 : पाकिस्तान की बौखलाहट अब सीमा पार कर चुकी है| पहले पाकिस्तान के विदेश सचिव ने आक्रामक बयान दिया कि यदि भारत अमेरिका की तरह कोई कार्रवाई करेगा तो उसका मुँहतोड़ जवाब देंगे और अब आईएसआई के मुखिया शुजा पाशा ने कह दिया कि यदि भारत ने पाकिस्तान के विरूद्घ [...]
Dainik Bhaskar, 18 May 2011 : प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की यह काबुल यात्रा ऐतिहासिक मानी जाएगी, क्योंकि पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान में भारत को क्षेत्रीय महाशक्ति के रूप में प्रतिबिंबित किया है। अब तक काबुल जाने वाले हमारे नेताओं ने हमेशा सिर्फ सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बढ़ाने की बात कही है। वे [...]
दैनिक भास्कर, 11 मई 2011: इधर उसामा बिन लादेन का सफाया हुआ, उधर तीन विदेश-यात्रएँ एक साथ हो रही हैं| भारत के प्रधानमंत्री अफगानिस्तान जा रहे हैं| उन्हीं तिथियों में पाकिस्तान के राष्ट्रपति रूस में रहेंगे और अगले सप्ताह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री चीन जाएंगे| यों तो ये तीनों यात्राएँ पहले से तय हो चुकी थीं लेकिन [...]
Navbharat Times, 09 May 2011 : ओसामा की मौत ने पाकिस्तान की मिट्टी पलीद कर दी है। पाकिस्तान ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह ‘ फेल्ड स्टेट ‘ बनता चला जा रहा है। अमेरिकी गुप्तचर संगठन सीआईए के प्रमुख लियोन पेनेट्टा ने दोटूक शब्दों में कहा है कि हम पाकिस्तान पर विश्वास नहीं [...]
Dainik Bhaskar, 20 April 2011 : जिसका शुरू से मुझे डर था, अब वही हो रहा है। लोकपाल के नाम पर उमड़ा अपूर्व जनाक्रोश अब अपूर्व दिग्भ्रम बनता चला जा रहा है। सबसे पहले अन्ना हजारे को ही लें। जब उन्हें अनशन पर बिठाया गया था, तब और अब, जबकि वे लोकपाल विधेयक कमेटी के [...]
राष्ट्रीय सहारा, 18 अप्रैल 2011 : पाकिस्तान और अमेरिका, दोनों के लिए एक नया सिरदर्द खड़ा हो गया है| भारत सरकार भी अब एक नई मुसीबत में फंस गई है| इस मुसीबत का जनक है, तस्व्वुर हुसैन राणा ! राणा यों तो कनाडा का नागरिक है लेकिन वह है मूलत: पाकिस्तानी| उसे भी डेविड कोलमन [...]
Dainik Hindustan, 17 April 2011 : प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का चीन जाकर ‘ब्रिक्स’ शिखर सम्मेलन में भाग लेना भारत के लिए काफी फायदेमंद रहा। सबसे पहला फायदा तो यही हुआ है कि चीन पटरी पर लौट आया है। पिछले साल पहले तो चीन ने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को बाकायदा वीजा देने की बजाय यात्रा-कागज पकड़ाना शुरू [...]
दैनिक भास्कर, 13 अप्रैल 2011 : आजादी के बाद अनशन तो कई हुए, लेकिन अन्ना हजारे का अनशन अपूर्व था| इतने कम समय में इतनी जबर्दस्त प्रतिक्रिया पहले कभी नहीं हुई| श्रीरामुलू के अनशन ने आंध्रप्रदेश बनाया और तारासिंह और फतेह सिंह के अनशन ने पंजाब बनाया| अन्ना के अनशन ने अभी तक कुछ नहीं [...]
दैनिक हिन्दुस्तान, 8 अप्रैल 2011 : अगर आज ईसा मसीह होते तो क्या करते ? अपना माथा कूट लेते| अगर कोई उन्हें टेरी जोन्स की हरकतों से वाकिफ करवा देता तो वे कहते कि ऐसे ईसाई धर्म से मेरा कोई लेना-देना नहीं है| फ्लोरिडा के किसी गुमनाम चर्च के पादरी जोन्स ने 20 मार्च को [...]
जनसत्ता, 07अप्रैल 2011 : जोज़फ लेलीवेल्ड का भला हो कि उनकी वजह से गांधी पर एक बार फिर लंबी-चौड़ी बहस शुरू हो गई है| कृतज्ञ भारत गांधी को सिर्फ हर 2 अक्तूबर या 30 जनवरी को याद करने को मजबूर हो जाता है वरना गांधी अब अजायबघर की वस्तु हो गए हैं| लेलीवेल्ड की पुस्तक [...]
Dainik Bhaskar, 06 April 2011 : भ्रष्टाचार ने माहौल को इतना गर्म कर दिया है कि इस समय लोकपाल के मुद्दे की प्रतिध्वनि सारे देश में सुनाई पड़ रही है। लोकपाल का अर्थ है, ऐसे पद की स्थापना जो राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सर्वोच्च न्यायाधीश से लेकर छोटे से छोटे सरकारी कर्मचारी के भ्रष्टाचार को पकड़े [...]
दैनिक भास्कर, 1 अप्रैल 2011 : कि्रकेट और कूटनीति में कितना गहरा रिश्ता है| कि्रकेट अगर अंग्रेज की गुलामी है तो हमारी कूटनीति अमेरिकियों की गुलामी है| इन दोनो गुलामियों का क्या सुंदर समागम हुआ है, मोहाली में ! दोनों गुलामियॉं दोनों देशों को एक-जैसी पि्रय हैं, क्योंकि दोनों अंग्रेज के गुलाम रहे हैं और [...]
दैनिक भास्कर, 23 मार्च 2011 : कैसी विडंबना है कि जूलियान असांज जैसा आदमी हमारे प्रधानमंत्री के कथन को सफेद झूठ बता रहा है और यह भी कह रहा है कि वे जानबूझकर लोगों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं| असांज को अदालत में घसीटना तो दूर रहा, भारत सरकार क्या उसके तीखे आरोपों [...]
Rastriya Sahara, 22 March 2011 : लीब्या ने ज्यों ही संयुक्तराष्ट्र के ‘उड़ान-निषिद्घ क्षेत्र्’ के प्रस्ताव को माना तो ऐसा लगा कि इस अरब राष्ट्र में शायद बातचीत से शांति लौट आएगी| ट्यूनीसिया और मिस्र की तरह कोई संतोषजनक समाधान निकल आएगा लेकिन लीब्याई तानाशाह मुअम्मर कज्ज़ाफी ने लड़ाकू जहाज उड़ाना तो बंद कर दिए [...]
Jansatta, 18 March 2011 : किसी भी सरकार के लिए इससे ज्यादा बुरा वक्त क्या हो सकता है, जो मनमोहनसिंह-सरकार को देखना पड़ रहा है| जितने घोटाले इस सरकार के राज में एक साथ हुए हैं, अभी तक किसी भी सरकार के राज में नहीं हुए| इस सरकार ने जनता के पैसे की जैसी लूट [...]
दैनिक भास्कर, दिल्ली, 16 मार्च 2011 : सारा देश इधर भ्रष्टाचार की खबरों से बिलबिला रहा है और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की हिम्मत देखिए कि उन्होंने सांसदों की स्थानीय विकास राशि दो करोड़ से बढ़ाकर पाँच करोड़ रू. कर दी| अब देश के प्रत्येक सांसद को हर साल पांच करोड़ रू. इसलिए मिलेंगे कि [...]
Dainik Hindustan, 16 March 2011 : भारत की राजनीति में भ्रष्टाचार फिर एक बार बड़ा मुद्दा बन गया है, लेकिन हैरत की बात यह है कि किसी के पास उसका कोई ठोस इलाज नहीं दिख रहा। प्रधानमंत्री माफी मांग लेते हैं और विपक्षी दल की नेता उन्हें तुरंत माफ कर देती हैं। विपक्ष संयुक्त संसदीय [...]
Dainik Bhaskar(BHOPAL), 09 March 2011 : आज सारा देश सदमे में है। वर्तमान सरकार की प्रतिष्ठा जितनी तेजी से पेंदे में बैठती जा रही है, आज तक किसी सरकार की नहीं बैठी। चीनी हमले और बोफोर्स के वक्त भी देश को धक्का लगा था, लेकिन दोनों प्रधानमंत्रियों की बाती बुझते-बुझते दो-ढाई साल लग गए थे। [...]
दैनिक हिन्दुस्तान, 5 मार्च 2011 : ट्यूनीसिया और मिस्र के मुकाबले लीब्या की बगावत ज़रा लंबी खिंचती चली जा रही है| अबीदीन बिन अली और हुस्नी मुबारक की तुलना में मुअम्मर कज्ज़ाफी ज्यादा बड़े तानाशाह सिद्घ हो रहे हैं| उन्होंने अपने 41 साल के राज में अपनी जड़ें इतनी गहरी कर ली हैं कि उन्हें [...]
दैनिक भास्कर, 03 मार्च 2011 : संयुक्त राष्ट्र ने लीब्या के विरूद्घ प्रतिबंधों की जो घोषणा की है, वह सर्वसम्मति से की है| 15 में से किसी भी सदस्य ने न तो प्रतिबंधों का विरोध किया और न ही कोई तटस्थ रहा| पश्चिमी राष्ट्रों द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव का समर्थन भारत ने भी किया| [...]