दैनिक भास्कर, 1 अप्रैल 2011 : कि्रकेट और कूटनीति में कितना गहरा रिश्ता है| कि्रकेट अगर अंग्रेज की गुलामी है तो हमारी कूटनीति अमेरिकियों की गुलामी है| इन दोनो गुलामियों का क्या सुंदर समागम हुआ है, मोहाली में ! दोनों गुलामियॉं दोनों देशों को एक-जैसी पि्रय हैं, क्योंकि दोनों अंग्रेज के गुलाम रहे हैं और [...]
दैनिक भास्कर, 23 मार्च 2011 : कैसी विडंबना है कि जूलियान असांज जैसा आदमी हमारे प्रधानमंत्री के कथन को सफेद झूठ बता रहा है और यह भी कह रहा है कि वे जानबूझकर लोगों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं| असांज को अदालत में घसीटना तो दूर रहा, भारत सरकार क्या उसके तीखे आरोपों [...]
Rastriya Sahara, 22 March 2011 : लीब्या ने ज्यों ही संयुक्तराष्ट्र के ‘उड़ान-निषिद्घ क्षेत्र्’ के प्रस्ताव को माना तो ऐसा लगा कि इस अरब राष्ट्र में शायद बातचीत से शांति लौट आएगी| ट्यूनीसिया और मिस्र की तरह कोई संतोषजनक समाधान निकल आएगा लेकिन लीब्याई तानाशाह मुअम्मर कज्ज़ाफी ने लड़ाकू जहाज उड़ाना तो बंद कर दिए [...]
Jansatta, 18 March 2011 : किसी भी सरकार के लिए इससे ज्यादा बुरा वक्त क्या हो सकता है, जो मनमोहनसिंह-सरकार को देखना पड़ रहा है| जितने घोटाले इस सरकार के राज में एक साथ हुए हैं, अभी तक किसी भी सरकार के राज में नहीं हुए| इस सरकार ने जनता के पैसे की जैसी लूट [...]
दैनिक भास्कर, दिल्ली, 16 मार्च 2011 : सारा देश इधर भ्रष्टाचार की खबरों से बिलबिला रहा है और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की हिम्मत देखिए कि उन्होंने सांसदों की स्थानीय विकास राशि दो करोड़ से बढ़ाकर पाँच करोड़ रू. कर दी| अब देश के प्रत्येक सांसद को हर साल पांच करोड़ रू. इसलिए मिलेंगे कि [...]
Dainik Hindustan, 16 March 2011 : भारत की राजनीति में भ्रष्टाचार फिर एक बार बड़ा मुद्दा बन गया है, लेकिन हैरत की बात यह है कि किसी के पास उसका कोई ठोस इलाज नहीं दिख रहा। प्रधानमंत्री माफी मांग लेते हैं और विपक्षी दल की नेता उन्हें तुरंत माफ कर देती हैं। विपक्ष संयुक्त संसदीय [...]
Dainik Bhaskar(BHOPAL), 09 March 2011 : आज सारा देश सदमे में है। वर्तमान सरकार की प्रतिष्ठा जितनी तेजी से पेंदे में बैठती जा रही है, आज तक किसी सरकार की नहीं बैठी। चीनी हमले और बोफोर्स के वक्त भी देश को धक्का लगा था, लेकिन दोनों प्रधानमंत्रियों की बाती बुझते-बुझते दो-ढाई साल लग गए थे। [...]
दैनिक हिन्दुस्तान, 5 मार्च 2011 : ट्यूनीसिया और मिस्र के मुकाबले लीब्या की बगावत ज़रा लंबी खिंचती चली जा रही है| अबीदीन बिन अली और हुस्नी मुबारक की तुलना में मुअम्मर कज्ज़ाफी ज्यादा बड़े तानाशाह सिद्घ हो रहे हैं| उन्होंने अपने 41 साल के राज में अपनी जड़ें इतनी गहरी कर ली हैं कि उन्हें [...]
दैनिक भास्कर, 03 मार्च 2011 : संयुक्त राष्ट्र ने लीब्या के विरूद्घ प्रतिबंधों की जो घोषणा की है, वह सर्वसम्मति से की है| 15 में से किसी भी सदस्य ने न तो प्रतिबंधों का विरोध किया और न ही कोई तटस्थ रहा| पश्चिमी राष्ट्रों द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव का समर्थन भारत ने भी किया| [...]
Dainik Bhaskar, 23 Feb 2011 : सऊदी अरब की तरह लीबिया को भी स्थायित्व का अभेद्य गढ़ माना जाता था, लेकिन मुअम्मर गद्दाफी का यह गढ़ ताश के पत्तों का महल सिद्ध हो रहा है। 41 साल से लीबिया के सीने पर सवार गद्दाफी को टीवी चैनल पर आकर कहना पड़ा है कि वे देश [...]
दैनिक हिन्दुस्तान, 18 फरवरी 2011 : अपने पड़ौसियों के बारे में चीन का असली सोच क्या है, यह पता लगाना आसान नहीं है| साम, दंड, भेद से भरी चीनी कूटनीति कब कौनसा पैंतरा अख्तियार करेगी, पता नहीं चलता| कौटिल्य का अर्थशास्त्र् लिखा तो गया है भारत में लेकिन उसे लागू किया जाता है, चीन में [...]
रा. सहारा, 16 फरवरी 2011 : पाकिस्तान की सरकार और अमेरिका के संबंधों में ऐसा तनाव कभी नहीं आया, जैसा आजकल आ गया है| पाकिस्तानी जनता ने तो अमेरिका के विरूद्घ कई बार अपना गुस्सा जमकर प्रगट किया है लेकिन पाकिस्तान की सभी सरकारें वाशिंगटन के सामने अपनी दुम हिलाती रही हैं| इसीलिए वाशिंगटन को [...]
दैनिक भास्कर (दिल्ली, 16 फरवरी 2011) : लगभग ढाई साल के अंतराल के बाद भारत-पाक वार्ता दुबारा शुरू करने की घोषणा हुई है| दोनों देशों के विदेश सचिव थिंपू में मिले और वे मान गए कि बातचीत के अलावा कोई चारा नहीं है| यों बातचीत तो भारत ने ही बंद की थी, मुंबई-हमले के बाद [...]
Dainik Hindustan, 10 Feb 2011 : हाल ही में सम्पन्न म्यूनिख के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में यों तो मिस्र की उथल-पुथल और ‘स्टार्ट’ संधि पर ज्यादा चर्चा हुई लेकिन नाटो राष्ट्रों- अमेरिका, रूस, भारत और पाकिस्तान- ने अफगानिस्तान पर काफी जोर दिया। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने खुद सम्मेलन को संबोधित किया और सार्वजनिक [...]
Dainik Bhaskar, 09 Feb 2011 : अब तक राजा था, अब महाराजा है। ए राजा ने अपनी चहेती कंपनियों को लाइसेंस दिए और देश के पौने दो लाख करोड़ रुपए का नुकसान किया, लेकिन सरकारी संगठन ‘इसरो’ ने देवास मल्टीमीडिया को एस-बेंड की लीज दी और पूरे दो लाख करोड़ रुपए का नुकसान कर दिया। [...]
रा. सहारा, 09 फरवरी 2011 : सात माह के गतिरोध के बावजूद जब अचानक यह खबर सुनी कि झलनाथ खनाल नेपाल के प्रधानमंत्री चुन लिये गये हैं तो मुझे सुखद आश्चर्य हुआ| सुखद इसलिए कि पिछले साल जून में माधव नेपाल सरकार का इस्तीफा हुआ था लेकिन 16 बार के मुकाबले में भी कोई फैसला [...]
दैनिक भास्कर (नई दिल्ली), 04 फरवरी 2011 : स्वतंत्र् भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ है| सरकार ने अपने ही एक पूर्व मंत्री को गिरफ्तार कर लिया| मंत्री और मुख्यमंत्री पहले भी गिरफ्तार हुए हैं लेकिन दूसरी सरकारों द्वारा ! इस एतिहासिक गिरफ्तारी से आम जनता में खुशी की लहर दौड़ गई है, [...]
Dainik Hindustan, 04 Feb 2011 : ट्यूनीशिया के पूर्व तानाशाह बिन अली के मुकाबले मिस्र के तानाशाह हुस्नी मुबारक कहीं ज्यादा मंजे हुए खिलाड़ी हैं। उन्होंने पूरा एक सप्ताह निकाल दिया और वह अभी तक देश छोड़कर भागे नहीं। उनका बेटा गमाल लंदन भाग चुका है, लेकिन वह अभी तक काहिरा में डटे हुए हैं। [...]
जनसत्ता, 03 फरवरी 2011 : स्विस बैंकों में भारत का कितना धन जमा है ? विभिन्न रपटों के मुताबिक यह लगभग 70 लाख करोड़ रू. है| यह इतनी बड़ी राशि है कि साधारण आदमी इसका हिसाब ही नहीं लगा सकता लेकिन इसे समझने का एक दूसरा तरीका भी है| अगर हम यह कहें तो बात [...]
Dainik Bhaskar, 29 Jan 2011 : आरिफ मोहम्मद खान को इस देश में शाह बानो मामले के ‘हीरो’ के तौर पर जाना जाता है| मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए राजीव गांधी सरकार के जिस मंत्री ने सदन की चलती बहस के दौरान ही अपना इस्तीफा लिखकर भेज दिया, उस शख्स का नाम [...]