दिल्ली उच्च न्यायालय के पास हुए विस्फोट ने एक बार फिर भारत की दुखती रग पर उंगली रख दी है| संसद या उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय कोई साधारण बाजार या भीड़भरे रेल्वे स्टेशन नहीं हैं| ये भारतीय राष्ट्र-राज्य के स्नायु-केंद्र हैं| अगर इन स्थानों की रक्षा करने में भी हम असमर्थ हैं तो भारत [...]
Posts Tagged 'आतंकवाद'
राष्ट्रीय सहारा, 27 जुलाई 2011 : अगर आपसे कोई पूछे कि आज विश्व की सबसे गंभीर समस्या क्या है तो आपका जवाब क्या होगा ? शायद यही कि आतंकवाद से ज्यादा खतरनाक कोई और समस्या नहीं है| यों तो समस्याऍं कई हैं| जैसे अमेरिका और यूरोप का आर्थिक संकट, भारत और चीन जैसे देशों में [...]
Navbharat Times, 29 Aug 2007 : क्या अब हैदराबाद भी आतंकवाद की सूची में एक और नाम की तरह टांग दिया जाएगा? लगता तो यही है। हर आतंकवादी खून-खराबे के बाद हमारे नेतागण जैसे मगरमच्छ के आंसू हमेशा बहाते हैं, वैसे उन्होंने अब भी बहा दिए हैं। हताहतों के प्रति सहानुभूति और सरकारी ढिलाई की निंदा करके [...]
NavBhart Times, 5 Nov 2005 : सुभद्राकुमारी चौहान ने कभी पूछा था, ‘वीरों का कैसा हो वसंत?’ अब पूछने का समय आ गया है कि ‘भारत की कैसी हो प्रतिकि्रया’, दिल्ली के बम-विस्फोटों पर, रघुनाथ मंदिर पर, अक्षरधाम पर, संसद पर और लालकिले पर हुए हमले पर ! संसद पर हुए हमले से भारत थोड़ा [...]
NavBhart Times, 04 Oct 2002 : अक्षरधाम के सबक बहुत गहरे हैं| पहला सबक तो यही है कि अक्षरधाम और गोधरा जैसी घटनाओं को राज्य के निकम्मे नेतृत्व के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता| यदि अक्षरधाम को गोधरा की तरह नरेंद्र मोदी के हवाले कर दिया जाता तो इस बार क्रिया की प्रतिक्रिया इतनी भयंकर [...]