Naya India, 29 sept 2011 : फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कबूतरों के पिंजरे में बिल्ली छोड़ दी है। उन्होंने वह काम कर दिखाया है, जो यासर अराफात जैसे चमत्कारी नेता भी नहीं कर सके। अब्बास ने संयुक्तराष्ट्र महासचिव बान-की-मून को एक औपचारिक अर्जी दे दी है और फलस्तीन को पूर्ण सदस्य बनाने का [...]
Posts Tagged 'इजराइल-फलस्तीन'
Rashtriya Sahara, 23 May 2011 : अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के नए प्रस्ताव का क्या अर्थ लगाया जाए ? उन्होंने इस्राइल से आग्रह किया है कि वह 1967 की सीमाओं को स्वीकार करे और फलस्तीन को पूर्ण राज्य का दर्जा लेने दे| वाशिंगटन पहुंचे इस्राइली प्रधानमत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने ओबामा के इस प्रस्ताव को यह [...]
राष्ट्रीय सहारा, 20 सितंबर 2010 : इस्राइल और फलस्तीन के बीच आजकल जो बात चल रही है, वह तलवार की धार पर चलने से कम नहीं है| यह तो स्पष्ट है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पहल नहीं करते तो यह संवाद संभव ही नहीं होता| पिछले साल गाजा पट्रटी में हमास और इस्राइल की [...]
राष्ट्रीय सहारा, 19 फरवरी 2009 : किसी भी देश में आम चुनाव होते हैं तो प्राय: एक पार्टी जीतती है और एक नेता प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनता है लेकिन इस बार इस्राइल में अजूबा हुआ है| दो-दो पार्टियाँ और दो-दो नेता सत्तारूढ़ होने और प्रधानमंत्री बनने का जश्न मना रहे हैं| यह कैसे हुआ [...]
राष्ट्रीय सहारा, 3 जनवरी 2009 : फलस्तीन और इस्राइल के बीच चल रही मुठभेड़ किसी युद्घ से कम नहीं हैं| 400 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों घायल हुए हैं| गाज़ा-क्षेत्र् का कौनसा नामी-गिरामी भवन है, जिसे इस्राइली राकेटों ने खंडहर में नहीं बदल दिया है| हफ्ते भर से चला यह युद्घ रूकने [...]
नवभारत टाइम्स, 28 June 2007 : अब से डेढ़ साल पहले किसने सोचा था कि फलस्तीन के दो टुकड़े हो जाऍंगे और वहॉं भी एक नए अल-क़ायदा की नींव पड़ सकती है| सच्चाई तो यह है कि पिछले 59 साल में उसके तीन टुकड़े हो गए हैं| पहले इस्राइल और फलस्तीन बने और अब ‘फतहस्तान’ [...]
R Sahara, 26 July 2006 : किसे गलत कहें ? इस्राइल को या हमास और हिजबुल्लाह को ? यह दुविधा सिर्फ मेरे जैसे मामूली लोगों की ही नहीं है, खुद लेबनान के प्रधानमंत्री, फलस्तीन के राष्ट्रपति, मिस्र, सउदी अरब और जोर्डन के शासकों, यूरोपीय नेताओं और भारत सरकार की भी है| अगर कोई दुविधा में [...]
राष्ट्रीय सहारा, 28 जनवरी 2006 : फलस्तीन के आम-चुनाव में ‘हमस’ की प्रचंड विजय विश्व-राजनीति की महत्वपूर्ण घटना है| फलस्तीन यों तो कोई स्वतंत्र् और संप्रभु राष्ट्र नहीं है| उसकी जनसंख्या और राष्ट्रीय सम्पदा भी नगण्य ही है लेकिन पश्चिम एशिया की राजनीति का वह बेरोमीटर है| फलस्तीन में जो कुछ होता है, उसका सीधा [...]
Dainik Bhaskar, 19 Jan 2005 : महमूद अब्बास ने फ्ऎलस्तीन के राष्ट्रपति का चुनाव क्या जीता, सारे अरब जगत में आशा और उमंग की लहरें दौड़ा दीं। यह ठीक है कि यासर अराफ्ऎात की तरह अब्बास सारी दुनिया में चमचमाने वाली कुतुब मीनार नहीं है लेकिन उन्हें दुनिया उस बंदरगाह की तरह देख रही है, [...]
R Sahara, 23 April 2004 : इस्राइली प्रधानमंत्री एरियल शेरोन का एरियल पता नहीं कौनसे आसमान में टंगा हुआ है। पता नहीं, कौनसी दैवीय या राक्षसी अदृश्य शक्तियॉं इन्हें संकेत भेजती रहती हैं और वे ऐसे कारनाम कर गुजरते हैं, जिन्हें अंजाम देने के पहले कोई भी जिम्मेदार नेता हजार बार सोचेगा। यह ठीक है [...]
R Sahara, 25 Sept. 2003 : इस्राइल के प्रधानमंत्री एरियल शेरोन की भारत-यात्रा में यहॉं तो कोई विघ्न नहीं हुआ लेकिन वह निर्विध्न भी नहीं रह सकी | तेल-अवीव और जेरुसलम में विध्न हो गया | पहले वे एक दिन देर से आए और अब उन्हें बीच में ही लौटना पड़ा | जिस आतंकवादी खतरे [...]
R Sahara 21 Sept 2003 : सारी दुनिया में शेर अपनी पूंछ को हिलाता है लेकिन पश्चिम एशिया में पूंछ अपने शेर को हिला रही है| पूंछ है, इस्राइल और शेर है, अमेरिका | सुरक्षा परिषद में जब यासर अराफात की हत्या के विरुद्घ प्रस्ताव आया तो अमेरिका ने उस पर वीटो (निषेधाधिकार) का प्रयोग [...]
Nav Bharat Times, 8 Sept 2003 : एरियल शेरोन के आने पर इतनी हाय-तौबा क्यों मच रही है ? विरोधी दलों के शीर्ष नेता संयुक्त बयान जारी कर रहे हैं और मुस्लिम संगठनों के नेता कह रहे हैं कि वे शेरोन-विरोधी प्रदर्शन करेंगे | शेरोन की तुलना नरेन्द्र मोदी से की जा रही है | [...]
हिन्दुस्तान, 04 जुलाई 2002: राष्ट्रपति बुश का भाषण उनके लिए नोबेल पुरस्कार का कारण बन सकता था लेकिन अब डेढ़-दो हफ्ते बाद ऐसा लगता है कि वह भाषण अरब-इस्राइली आग को भड़काने में घी का काम करेगा| भाषण का मुखड़ा इतना बढि़या था कि फलस्तीनी नेता यासर अराफात भी उस पर फिदा हो गए| उन्होंने [...]
09 अप्रैल 2002 : ईसा को शांति का मसीहा माना जाता है| उनके जन्म-स्थान बेथलेहम का आज क्या हाल है ? दुआ के लिए उठे हाथों की बजाय आज बेथलेहम पर बंदूकें तनी हुई हैं और ‘चर्च ऑफ नेटिविटी’ पर बम बरस रहे हैं| सिर्फ ईसाइयों के गिरजे ही नहीं, यहूदियों के सिनेगॉग और मुसलमानों [...]