नवभारत टाइम्स, 3 जनवरी 2007 : फांसी तो सद्दाम को लगी है, लेकिन वह अनेक राष्ट्रों, पार्टियों और नेताओं के गले की फांस बन गई है| कुवैत और ईरान को ज़रा अभी छोड़ दें| उन दोनों देशों पर सद्दाम ने हमला किया था| इसीलिए वे तो गद्रगद् हैं, लेकिन लीब्या के अलावा दुनिया का कोई [...]
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June 2004 : सद्दाम हुसैन ने अपने मुकदमे को “नाटक” की संज्ञा दी है| लेकिन उससे भी बड़ा नाटक है अमरीकियों द्वारा एराक की संप्रभुता की वापसी| क्या सचमुच एराक को उसकी संप्रभुता वापस मिली है? यदि मिली होती तो वापसी का समारोह इस तरह चोरी-चोरी क्यों होता? अमेरिकी प्रशासक पॉल ब्रेमर को अपने सिर [...]
Nav Bharat Times, 17 Dec 2003 : जेल में पड़ा सद्दाम, गड्ढे में छुपे सद्दाम से अधिक बड़ा सिरदर्द साबित होगा, यह बात अभी जॉर्ज बुश और टोनी ब्लेयर को समझ नहीं पड़ रही है, इसीलिए वे एक-दूसरे को बधाइयॉं दे रहे हैं| गॉंव के किसी गड्ढे में छिपा हुआ सद्दाम अमेरिका का क्या बिगाड़ [...]
Nav Bharat Times, 14 July 2003 : यहॉं अमेरिका में सरकार के बड़े अफसर और बुश प्रशासन के सलाकहार चाहते हैं कि भारत सरकार अपनी फौजें जल्दी से जल्दी एराक भिजवा दें| भारत सरकार उनकी इच्छा अवश्य पूरी करेगी, ऐसा मानने के कई आधार उनके पास है| वे जानते हैं कि भारत सरकार पाकिस्तान के [...]
राष्ट्र्रीय सहारा, 17 अप्रैल 2003 :
राष्ट्र्रीय सहारा 08 फरवरी 2003 :
Nav Bharat Times, 14 Nov. 2002 : समझ में नहीं आ रहा कि इसे किसकी विजय कहा जाए ? सुरक्षा परिषद् की या अमेरिका की या एराक की ? या तीनों की ? सुरक्षा परिषद् ने अपना प्रस्ताव सर्वानुमति से पारित किया है| पन्द्रह में से एक राष्ट्र ने भी इस प्रस्ताव का विरोध नहीं [...]