Dainik Bhaskar, 22 sept. 2010 : सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल की कश्मीर यात्रा बहुत सार्थक सिद्ध हो रही है। महाभारत के युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण ने कौरवों के साथ वार्ता में जो चतुराई दिखाई थी, वही अब श्रीनगर में भी दिखाई पड़ रही है। अलगाववादी नेताओं के घर जाकर मिलना लचीली कूटनीति का सुंदर उदाहरण है। [...]
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Dainik Hindustan : कश्मीर के हालात पर दिया गया प्रधानमंत्री का भाषण अत्यंत मार्मिक था| उसके शब्द और शैली दिल में घर करनेवाले थे लेकिन उसका कितना असर हुआ ? दो दिन बाद ही कश्मीरी जनता फिर मैदान में निकल आई और फिर चार-पांच नौजवान मारे गए| पिछले दो माह में जितन दिन होते हैं, [...]
दैनिक भास्कर, 25 अगस्त 2008 : हमारे कुछ मोमदिल पत्र्कार बहुत जोरों से पिघल रहे हैं| अंग्रेजी के ये पत्र्कार कह रहे हैं कि भारत कश्मीर खाली कर दे| अगर कश्मीर की जनता आज़ादी चाहती है तो उसे वह दे क्यों न दे ? भारत का पिंड छूटे| पाँच लाख फौजी घर लौटें| रोज का [...]
NavBharat Times, 8 Aug 2008 : कोई गैर मुद्दा कैसे बहुत नाजुक मुद्दा बन जाता है, इसकी मिसाल हैजम्मू-कश्मीर। जम्मू औरकश्मीर के बीच लगा आड़ा हाइफन अब खड़ी दीवार बन गया है। एक ही प्रांत के दो हिस्से एक-दूसरे के खिलाफ इस तरह लामबंद पहले कभी नहीं हुए। हमारे राजनीतिक दल और उनके नेता भौंचक हैं। उनकी कोई [...]
जनसत्ता, 19 मार्च 2008 : पाकिस्तानी चुनाव में कश्मीर कोई खास मुद्दा था ही नहीं| न तो नेतागण अपनी सभाओं में उसका जिक्र करते थे और न ही उम्मीदवारों को फुर्सत थी कि वे कश्मीर के सोये भूत को जगाऍं| सारे नेता, अखबार और चैनल फौजी तानाशाही, अमेरिकी वर्चस्व, आतंकवाद, बेनज़ीर की हत्या और मंहगाई [...]
नवभारत टाइम्स, 24 मई 2005 : दक्षिण एशिया के सांसदों के सामने मुशर्रफ ने कश्मीर के बारे में जो कहा है, उस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है| खुद मुशर्रफ को पता है कि उनके हाथ में कोई जादू की छड़ी नहीं है लेकिन यह तो मानना पड़ेगा कि कश्मीर के हल को [...]
Dainik Bhaskar, 3 Dec 2004 : प्रधानमंत्री तो दोनों ही हैं, डॉ. मनमोहनसिंह और श्री शौकत अजीज भी, लेकिन दोनों बराबर नहीं हैं| मनमोहन भारत के नम्बर-एक हैं जबकि पाकिस्तान के नम्बर-एक जनरल मुशर्रफ हैं| इसीलिए मनमोहन-अज़ीज़ वार्ता में से कुछ चमत्कारी निष्कर्षों की आशा कोई भी नहीं कर रहा था| इसके अलावा शौकत अज़ीज़ [...]
Nav Bhart Times, 12 Oct 2002: जम्मू-कश्मीर के चुनाव में पाकिस्तान साफ़-साफ़ हार गया | कैसे हार गया ? न तो उसने खुद चुनाव लड़ा और न ही पाकिस्तानपरस्त संगठनों ने| फिर भी वह इसलिए हार गया कि जम्मू-कश्मीर में न सिर्फ चुनाव सम्पन्न हो गए बल्कि निष्पक्ष और विधिवत हुए| यहाँ तक कि भारत-विरोधी [...]