Posts Tagged 'कांग्रेस'

Posted by: on: October 30 2009 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा, 30 अक्टूबर 2009 : भारत की विदेश नीति तो बनाई जवाहरलाल नेहरू ने और चलाई कई प्रधानमंत्रियों ने लेकिन जैसे झंडे इंदिरा गांधी ने गाड़े, कोई और नहीं गाड़ सका| ऐसे चमत्कारी काम कभी-कभी सुसंयोग और अनुकूल परिस्थितियों के कारण भी हो जाते हैं लेकिन जिन कामों का यहां जिक्र किया जा रहा [...]

Posted by: on: October 24 2009 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 24 अक्टूबर 2009 :  राहुल गांधी वास्तव में गांधी नहीं हैं| वह हैं, राहुल-सोनिया या राहुल-राजीव या राहुल-इंदिरा या राहुल-नेहरू या राहुल-फिरोज गांधी ! गांधी से उनकी दूर-दूर तक कोई रिश्तेदारी नहीं है|  राहुल के दादा, जिन्हें हम गलती से फिरोज गांधी कहते हैं, वे अपना उपनाम ‘घंदी’ लिखा करते थे, जैसे कि [...]

Posted by: on: April 18 2008 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 18 अप्रैल 2008 : प्रियंका और नलिनी की भेंट में बहुत-से लोग राजनीति पढ़ रहे हैं| यह उनका दोष नहीं है| राजनीति की फितरत ही कुछ ऐसी है| अपने प्रतिस्पर्धी तो क्या, अपने किसी पि्रय साथी का यदि थोड़ा-सा भी उत्कर्ष हो जाए, उसकी लोकपि्रयता बढ़ जाए या मीडिया में उसे प्रचार मिल [...]

Posted by: on: March 11 2005 • Categorized in: Articles

Nav Bharat Tims, 11 March 2005 : जैसा झटका आपात्काल ने इंदिरा गॉंधी की प्रतिष्ठा को दिया था, लगभग वैसा ही अब सोनिया को लगा है| पिछले दिनों गोवा और झारखंड में जो कुछ हुआ, वह आपात्काल के मुकाबले काफी मामूली घटना है और मूलत: प्रादेशिक मामला है लेकिन उसका असर सारे देश में हो [...]

Posted by: on: March 3 2004 • Categorized in: Articles

Panjab Kesri, 3 March 2004 : पहला प्रश्न तो यही है कि यदि सोनिया गॉंधी विदेशी नहीं होतीं तो भी क्या वे इस लायक होतीं कि भारत की प्रधानमंत्री बनतीं? भारत जैसे विशाल और जटिल राष्ट्र के प्रधानमंत्री बनने के लिए जो न्यूनतम गुण किसी व्यक्ति में होने चाहिए, क्या वे भी सोनिया गॉंधी में [...]

Posted by: on: February 19 2004 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर,19 फरवरी 2004 : भाजपा के ‘इंडिया शाइनिंग’ (चमकता भारत) नारे के मुकाबले कॉंग्रेस को अब ‘राजीव शाइनिंग’ (चमकते राजीव) नारा हाथ आ गया है| जिस बेरहमी से केंद्र सरकार विज्ञापनों पर पैसा बहा रही है, उसके मुकाबले अब कॉंग्रेस भी खम ठोक रही है| दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को कॉंग्रेस ने अपनी [...]

Posted by: on: February 19 2004 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 19 फरवरी 2004 :

Posted by: on: January 7 2004 • Categorized in: Articles

R Sahara, 07 Jan 2004 : कितना करुणाजनक दृश्य है, यह ? कॉंग्रेस की अध्यक्ष रामविलास पासवान के घर पैदल जा रही हैं, जैसी कभी सलीम की चाहत में बादशाह अकबर फतेहपुर सीकरी गए थे| कभी वे उन करुणानिधि को फोन मिला रही हैं, जिनकी पार्टी को उनकी पति की हत्या से संबंधित पाया गया [...]

Posted by: on: December 1 2003 • Categorized in: Articles

R Sahara, Dec 2003 : पॉच राज्यों के चुनाव-परिणाम आने के बाद जिस सोनिया गॉंधी को कई समीक्षक ‘गॅूगी गुडि़या’ कहने  लगे थे, उसे सोनिया गॉंधी ने आज एक अन्तरराष्ट्रीय समारोह में अचानक पूछे गए टेढ़े-मेढ़े सवालों के सटीक जवाब देकर श्रोताओं का मन मोह लिया| तथाकथित ‘गॅूंगी गुडि़या’ ने अपने आपको ‘मनमोहक गुडि़या’ सिद्घ [...]

Posted by: on: November 15 2002 • Categorized in: Articles

R Sahara, 15 Nov. 2002 : पंचमढ़ी की काँग्रेस के मुकाबले माउंट आबू की काँग्रेस कितनी अलग है| माउंट आबू में न तो काँग्रेस महासमिति का अधिवेशन था और न ही कार्यसमिति की बैठक ! सिर्फ 14 राज्यों के काँग्रेसी मुख्यमंत्री वहाँ मिले थे लेकिन इस मिलन का महत्त्व किसी भी अधिवेशन से कम नहीं [...]

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