Posts Tagged 'चीन'

Posted by: on: April 26 2013 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, भोपाल, 26 अप्रैल 2012:  चीन गज़ब का पैंतरेबाज मुल्क है| एक ओर वह भव्य और गरिमामय महाशक्ति का आचरण करते हुए दिखाई देना चाहता है और दूसरी ओर वह ओछी छेड़खनियों से बाज नहीं आता| अभी 15 अप्रैल को उसकी फौज ने सीमांत के दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में घुसकर अपने तंबू खड़े [...]

Posted by: on: August 4 2011 • Categorized in: Articles

Sahara Samay, 04 Aug 2011 : अपने यहां कहावत है कि ‘जाके पैर न फटे बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई’! चीन अब तक भारत की शिकायतों पर आंख मूंदे बैठा रहता था. उसे पाकिस्तान की आतंकवादी भूमिका कभी आपत्तिजनक नहीं दिखाई पड़ती थी. वह जान बूझकर मक्खी निगल रहा था लेकिन अब काशगर में हुए [...]

Posted by: on: February 18 2011 • Categorized in: Articles

दैनिक हिन्दुस्तान, 18 फरवरी 2011 : अपने पड़ौसियों के बारे में चीन का असली सोच क्या है, यह पता लगाना आसान नहीं है| साम, दंड, भेद से भरी चीनी कूटनीति कब कौनसा पैंतरा अख्तियार करेगी, पता नहीं चलता| कौटिल्य का अर्थशास्त्र् लिखा तो गया है भारत में लेकिन उसे लागू किया जाता है, चीन में [...]

Posted by: on: December 18 2010 • Categorized in: Articles

जनसत्ता, 18 दिसंबर 2010 : चीनी प्रधानमंत्री विन च्या पाओ (सही उच्चारण) पांच साल में दूसरी बार भारत आए हैं| दोनों देशों का कोई भी प्रधानमंत्री इतने कम समय में इतनी बार अपने पड़ौसी देश में कभी नहीं गया| पांच साल का समय क्या है ? कुछ नहीं, भारत और चीन के बीच जैसा कि [...]

Posted by: on: December 14 2010 • Categorized in: Articles

Dainik Hindustan, 14 Dec 2010 :  चीनी प्रधानमंत्री विन च्या पाओ (सही उच्चारण) की यह भारत-यात्रा महत्वपूर्ण है, लेकिन यह असाधारण नहीं लग रही है, क्योंकि इस माह के अंत तक दुनिया की सभी महाशक्तियों के नेता भारत आ चुके होंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड केमरॉन, अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा और फ्रांस के राष्ट्रपति सरकोजी पिछले [...]

Posted by: on: September 12 2010 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा, 12 सितंबर 2010 :   चीनी तिकड़मों के मुकाबले हमारी सरकार निढाल-सी मालूम पड़ती है| हमारा विदेश मंत्रलय चीनी राजदूत को बुलाकर उसके सामने लटपट भाषा में अपनी निराशा प्रगट कर देता है ओर तब तक चुप हो जाता है जब तक कि कोई नया विवादास्पद मुद्दा सामने नहीं आ जाता| पिछले चार-पांच वर्षों [...]

Posted by: on: August 31 2010 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा, 31 अगस्त 2010 | चीन की हिमाकत पर सबको आश्चर्य हो रहा है| जो देश जी-20 के सम्मेलन में भारत के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है, जो पर्यावरण मुद्दों पर भारतीय समर्थन पाने को बेताब रहता है, जो भारत के साथ सामरिक सहकार की पींगे भर रहा है, जो अंतरिक्ष में [...]

Posted by: on: April 12 2010 • Categorized in: Articles

Dainik Hindustan, 12 April 2010 : सभी पूछ रहे हैं कि हमारे विदेश मंत्री आखिर चीन गए ही क्यों? वहां जाकर क्या मिला? सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि दोनों देशों के बीच ‘हॉट लाइन’ कायम हो गई। इस ‘हॉट लाइन’ की जरूरत क्या थी? संचार क्रांति के इस जमाने में दोनों प्रधानमंत्रियों को अगर आपस में बातकरनी हो तो [...]

Posted by: on: October 8 2009 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 8 अक्टूबर 2009 : आखिर चीन ऐसा क्यों कर रहा है ? क्या कारण है कि वह हमारे कश्मीरी और अरूणाचली नागरिकों को वीज़ा वैसे नहीं दे रहा है, जैसे अन्य भारतीय नागरिकों को देता है? इन नागरिकों के पासपोर्टों पर वह वीज़ा नहीं छापता| उसका दूतावास इन नागरिकों को वीज़ा का एक [...]

Posted by: on: September 27 2009 • Categorized in: Articles

दै. भास्कर, 27 सितंबर 2009 : चीन को लेकर भारत में अजीब-सी स्थिति पैदा हो गई है| ऐसा लगता है कि जनता जाग रही है और सरकार सो रही है| सीमा पर चीन क्या-क्या हरकतें कर रहा है, यह जानने के जितने साधन जनता के पास हैं, उनसे कहीं ज्यादा सरकार के पास हैं| जनता [...]

Posted by: on: July 14 2009 • Categorized in: Articles

दै. भास्कर, 14 जुलाई 2009 : पिछले साल जब तिब्बत में दंगे हुए थे तो दुनिया को कोई खास आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि दलाई लामा का नाम दुनिया के हर कोने में पहले से पहुंचा हुआ था लेकिन शिंच्यांग के दंगों की खबर ने लोगों को झकझोर दिया| ज्यादातर लोगों को यह ही पता नहीं [...]

Posted by: on: June 12 2008 • Categorized in: Articles

रा. सहारा, 12 जून 2008 : प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को अभी चीन गए, छह माह भी नहीं हुए थे कि प्रणव मुखर्जी चीन चले गए| क्यों गए, यह समझ में नहीं आया| कोई मंत्री, खासतौर से विदेश मंत्री, जब किसी देश की यात्रi करता है तो उसके साथ कई उच्च अधिकारियों और सहायकों का लाव-लवाजिमा जाता [...]

Posted by: on: April 7 2008 • Categorized in: Articles

नवभारत टाइम्स, 7 अप्रैल 2008 : क्या हम चीन से डरते हैं? यदि नहीं तो फिर क्या वजह है कि हम तिब्बत पर मौन हैं? जिन देशों का तिब्बत से कुछ लेना-देना नहीं है, वे तो खुलकर बोल रहे हैं लेकिन हम उल्टे दलाई लामा पर उपदेश झाड़ रहे हैं| हमारे विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी [...]

Posted by: on: March 21 2008 • Categorized in: Articles

नवभारत टाइम्स, 21 मार्च 2008 : तिब्बत के सवाल पर भारत सरकार ने अभी तक जो कुछ कहा है, उसका ठोस अर्थ क्या है, यह वह स्वयं जानती हैं| यह अवसर बोलने का कम और कुछ कर गुजरने का ज्यादा हैं| विपक्ष ने संसद में शोर जरूर मचाया लेकिन तिब्बत के सवाल पर हमारी सभी [...]

Posted by: on: March 16 2008 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 16 मार्च 2008 : तिब्बत की कराह ने सारी दुनिया को कॅंपा दिया है| दुनिया को पता है कि जो चीनी सरकार अपनी हान जाति के चीनी नौजवानों को हजारों की संख्या में मार सकती है, वह तिब्बतियों को क्यों बख्शेगी| चीनी सरकार के मुताबिक अभी तक ल्हासा में सिर्फ दस आदमी मरे [...]

Posted by: on: January 28 2008 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 28 जनवरी 2008 : हमारे कॉमरेड अब क्या कर रहे हैं? प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जैसे ही चीन से लौटे, भारत की कम्युनिस्ट पार्टियों ने झॉंझ-मजीरे कूट-कूटकर उनका स्वागत किया| करना ही था| दूसरों ने भी किया, क्योंकि उनकी यात्र सफल मालूम पड़ रही थी| यात्र की सफलता के पीछे व्यापार-वृद्घि आदि दूसरे [...]

Posted by: on: January 19 2008 • Categorized in: Articles

NavBharat Times, 19 Jan 2008 : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन यात्रा आशा से अधिक सफल हुई, इसमें जरा भी संदेह नहीं। जो नींव राजीव गांधी, नरसिंहराव और अटलबिहारी वाजपेयी ने भरी थी, आज उस पर मैत्री और सहयोग का महल मनमोहन सिंह ने खड़ा कर दिया। दोस्ती कीदीवानगी में भी जो बातें अब से 55 साल [...]

Posted by: on: January 12 2008 • Categorized in: Articles

रा. सहारा, 12 जनवरी 2008 : डॉ. मनमोहन सिंह के पहले अटलबिहारी वाजपेयी, नरसिंहराव और राजीव गांधी चीन जा चुके हैं लेकिन मनमोहनसिंह के चीन जाने की बात ही कुछ और है| अगर डॉं. मनमोहन सिंह अब से 20 साल पहले चीन जाते तो अपने सच्चे समरूप श्री दंग स्याओ पिंग को सिंहानसन पर बैठा [...]

Posted by: on: July 23 2006 • Categorized in: Articles

Jansatta, 23 July 2006 : पिछले दो हजार साल में भारत ने चीनियों को इतनी विद्याएँ, इतना धर्म, इतना दर्शन और इतना आचार-विचार सिखाया है कि अब हम उनसे कुछ सीखना चाहें तो इसमें हमारे आत्म-सम्मान को ठेस लगने का कोई प्रश्न नहीं उठता| पिछले तीन हफ्ते मैं चीन में रहा तो पहले 8-9 दिन [...]

Posted by: on: August 21 2005 • Categorized in: Articles

Jansatta, 21 Aug 2005 : चीनियों के बारे में हम भारतीयों की धारणा यह है कि वे सब कुछ खा जाते हैं| कोई ऐसा प्राणी नहीं, जिसे वे न खाते हों| जमीन पर चलनेवाला हर प्राणी, पानी में तैरनेवाला हर प्राणी और आसमान में उड़नेवाला हर प्राणी चीनियों के पेट में आसानी से समा जाता [...]

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