रा. सहारा, 10 अप्रैल 2007 : दक्षेस का यह 14वाँ सम्मेलन पिछले 13 सम्मेलनों से कुछ बेहतर रहा| सबसे अच्छी और पहली बात यह हुई है कि अफगनिस्तान दक्षेस में शामिल हुआ| यह काम दक्षेस की स्थापना के समय याने 22 साल पहले ही हो जाना चाहिए था| यदि दक्षेस का मतलब ‘दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय [...]
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R Sahara, 19 Nov. 2005 : जो लोग दक्षेस की तुलना ‘एसियान’ या ‘यूरोपीय आर्थिक समुदाय’ से करते हैं, वे तो निराश ही होंगे| वे कह सकते हैं कि दक्षेस का ढाका-सम्मेलन निरर्थक रहा| नेताओं ने गप्पे हांकने, भाषण झाड़ने और सैर-सपाटा करने के अलावा क्या किया? बरसों पुराने प्रस्ताव उन्होंने दुबारा पास कर दिए| [...]
Nai Dunia, 9 March 2005 : ‘दक्षेस’ को बने 20 साल हो गए लेकिन अब तक उसके केवल 12 शिखर सम्मेलन ही हुए| 8 नहीं हुए| क्यों नहीं हुए? उन्हें प्रतिवर्ष होना ही चाहिए था, क्योंकि दक्षेस के घोषणा-पत्र में वैसा लिखा गया है| ऐसा नहीं है कि जब-जब भी शिखर सम्मेलन स्थगित हुआ, उसके [...]
नवभारत टाइम्स, 16 दिसम्बर 2004 : दक्षेस को बने 20 साल हो गए लेकिन वह 20 कदम भी आगे नहीं बढ़ा| यदि यूरोपीय समुदाय और आसियान की तरह वह सफल हो जाता तो आज दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब लोग दक्षिण एशिया में नहीं होते| करोड़ों लोगों को अभाव और अशिक्षा से छुटकारा मिलता| दक्षेस [...]
Nav Bharat Times, 9 Jan 2004 : जैसा दक्षेस सम्मेलन इस बार हुआ, पहले कभी नहीं हुआ| भारत-पाक संवाद का संकल्प तो उसकी सर्वोच्च उपलब्धि है ही लेकिन उसके अलावा तीन ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दक्षेस-राष्ट्रों की सहमति हुई है कि अगर उन पर अमल हो गया तो 21वीं सदी को एशिया की सदी बनने [...]
दैनिक भास्कर – 08 जनवरी 2004 : इस्लामाबाद में हुए दक्षेस सम्मेलन ने लगभग असंभव को संभव बना दिया है| आगरा में जो तार टूटा था, उसके जुड़ने की दूर-दूर तक कोई संभावना नज़र नहीं आ रही थी| शक यह था कि अटलजी और मुशर्रफ में शायद भेंट ही न हो लेकिन ये सब शक [...]
Dainik Bhaskar, 4 Dec 2003 : भारत और पाकिस्तान के बीच कैसे-कैसे अजूबे होते रहते हैं| दोनों पड़ौसियों के संबंध कब खाई में उतर जाऍंगे और कब पहाड़ पर चढ़ जाऍंगे, कुछ पता ही नहीं चलता| अभी कुछ माह पहले दोनों देश एक-दूसरे को सबक सिखाने का दावा कर रहे थे और अब अचानक उन्होंने [...]