Posts Tagged 'नेपाल'

Posted by: on: February 8 2011 • Categorized in: Articles

रा. सहारा, 09 फरवरी 2011 : सात माह के गतिरोध के बावजूद जब अचानक यह खबर सुनी कि झलनाथ खनाल नेपाल के प्रधानमंत्री चुन लिये गये हैं तो मुझे सुखद आश्चर्य हुआ| सुखद इसलिए कि पिछले साल जून में माधव नेपाल सरकार का इस्तीफा हुआ था लेकिन 16 बार के मुकाबले में भी कोई फैसला [...]

Posted by: on: August 6 2010 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर (नई दिल्ली, 06 अगस्त 2009) : नेपाल जैसी दुर्दशा में फंसा है, दक्षिण एशिया का शायद ही कोई देश फंसा हो| संसद में तीन बार मुकाबला हो चुका लेकिन कोई भी प्रधानमंत्र्ी नहीं चुना गया| नेपाल के तीन प्रमुख दल हैं, माओवादी, नेपाली कांग्रेस और एकीकृत माओवादी लेनिनवादी पार्टी (एमाले)| इन तीनों पार्टियों [...]

Posted by: on: July 5 2010 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय  सहारा, 5 July 2010 : नेपाल के प्रधानमंत्री माधव नेपाल इस्तीफा नही देते तो क्या करते? वे पूरी तरह घिर गए थे। माओवादी तो उन्हें हटाना ही चाहते थे, उनकी अपनी पार्टी ‘एमाले’ के अध्यक्ष झलनाथ खनाल और स्पीकर सुभाष नेमबांस ने भी उनके विरुद्ध बगावत का झंडा खड़ा कर दिया था। यदि वे [...]

Posted by: on: March 25 2010 • Categorized in: Articles

Dainik Hindustan, 25 March 2010 : भारत में जो हैसियत कभी जवाहरलाल नेहरू की हुआ करती थी, वही नेपाल में गिरिजाप्रसाद कोइराला की थी। नेहरूजी के जमाने में अक्सर यह सवाल पूछा जाता था कि नेहरू के बाद कौन? लेकिन नेपाल में यह सवाल नहीं पूछा जा रहा है, क्योंकि गिरिजा बाबू ने अपनी बेटी [...]

Posted by: on: March 25 2010 • Categorized in: Articles

Dainik Hindustan, 25 March 2010 : भारत में जो हैसियत कभी जवाहरलाल नेहरू की हुआ करती थी, वही नेपाल में गिरिजाप्रसाद कोइराला की थी। नेहरूजी के जमाने में अक्सर यह सवाल पूछा जाता था कि नेहरू के बाद कौन? लेकिन नेपाल में यह सवाल नहीं पूछा जा रहा है, क्योंकि गिरिजा बाबू ने अपनी बेटी सुजाता, अपने [...]

Posted by: on: September 9 2009 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 9 सितंबर 2009 : नेपाल का हाल भी अजीब है| जरा दो मामलों पर गौर कीजिए-एक उपराष्ट्रपति की हिंदी शपथ का और दूसरा पशुपतिनाथ मंदिर के पुजारियों का ! यूं तो ये नेपाल के आंतरिक मामले मालूम पड़ते हैं और कहा जा रहा है कि इनका भारत से क्या लेना-देना ? लेकिन सच्चाई [...]

Posted by: on: May 27 2009 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 27 May 2009 : हमारे पड़ोसी मुल्क नेपाल में माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व में नई सरकार बन तो गई, लेकिन वह चलेगी कैसे? जहां तक संख्या का सवाल है, नई सरकार के पास जरूरत से ज्यादा बहुमत है। सरकार कायम रखने के लिए सिर्फ ३0१ सांसदों का समर्थन चाहिए, लेकिन उसे साढ़े [...]

Posted by: on: August 18 2008 • Categorized in: Articles

Navbharat Times, 18 Aug 2008 : नेपाल के माओवादी नेता प्रचंड का प्रधानमंत्री बनना सर्वथा स्वागत योग्य घटना है। उन्हें दो-तिहाई से भी ज्यादा वोट मिले हैं। किसी भी सरकार के लिए इससे बड़े समर्थन की क्या जरूरत है? इतने बड़े समर्थन को अगर प्रचंड लगातार बनाए रखें तो नेपाल का संविधान दो साल की [...]

Posted by: on: August 3 2008 • Categorized in: Articles

रा. सहारा, 3 अगस्त 2008 : कार्यवाहक प्रधानमंत्री गिरिजाप्रसाद कोइराला दक्षेस सम्मेलन में कोलंबो जा पाऍंगे, यह सुखद समाचार है, वरना दक्षेस का 15 वॉं सम्मेलन ही स्थगित हो जाता| दक्षेस चार्टर के अनुसार यह आवश्यक है कि सभी सदस्य राष्ट्रों के शासनाध्यक्ष सम्मेलन में भाग लें| अगर एक भी सदस्य-राष्ट्र के अनुपस्थित होने की [...]

Posted by: on: June 6 2008 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 6 जून 2008 :  नेपाल की गाड़ी फिर अधबीच में फंस गई है| शाह ज्ञानेंद्र को हटाने में नेपाली नेताओं ने जिस एकता का परिचय दिया था, वह पिछले एक हफ्ते में हवा हो गई है| नेपाली राजनीति आज शीर्षासन की मुद्रा में है| चुनाव संपन्न हुए दो माह होने आए लेकिन अभी [...]

Posted by: on: May 30 2008 • Categorized in: Articles

रा. सहारा, 30 मई 2008 : नेपाल में राजशाही का अंत जिस सहजता से हो रहा है, शायद इसके पहले दुनिया में कहीं नहीं हुआ| संविधान सभा एक प्रस्ताव पारित करे और एक क्षण में ही भगवान विष्णु का अवतार, श्री श्रीपॉंच, सेनाधिपति, महाराजाधिराज और न जाने किन-किन उपाधियों से मंडित नेपाल-नरेश, साधारण नेपाली नागरिक [...]

Posted by: on: May 12 2008 • Categorized in: Articles

NavBharat Times, 12 May 2008 : नेपाल का हाल पाकिस्तान से भी ज्यादा टेढ़ा है। पाकिस्तान में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, लेकिन वहां सरकार बन गई। नेपाल में भी किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, लेकिन चार प्रमुख पार्टियां अभी तक यही तय नहीं कर पाई हैं कि सरकार बने तो कैसे बने? 10 [...]

Posted by: on: April 8 2008 • Categorized in: Articles

रा. सहारा, 8 अप्रैल 2008 : नेपाल अपनी संविधान सभा 10 अप्रैल को चुनेगा| 10 अप्रैल को चुनाव होंगे या नहीं, यह भी अभी तक सुनिश्चित नहीं है| संविधान सभा के चुनाव पिछले साल दो बार स्थागित हो चुके हैं| चुनावों को स्थगित करने में हर प्रमुख दल और प्रमुख नेता की दिलचस्पी है| यदि [...]

Posted by: on: September 21 2007 • Categorized in: Articles

रा. सहारा, 21 सितंबर 2007 : माओवादियों ने कोईराला सरकार से इस्तीफा क्या दिया, नेपाल को दुबारा चौराहे पर ला खड़ा किया है| अभी केवल चार माओवादी मंत्री ही सरकार से बाहर आए हैं| कोई आश्चर्य नहीं कि सारे माओवादी सांसद अपने पद से इस्तीफा दे दें| यों तो आज की नेपाली सरकार और संसद [...]

Posted by: on: April 17 2007 • Categorized in: Articles

प्रथम प्रवक्ता, 17 अप्रैल 2007 : नेपाल में ऐसे-ऐसे अजूबे हो रहे हैं, जो दुनिया के शायद ही किसी देश में हुए हों| विष्णु के अवतार और सर्वशक्तिमान समझे जाने वाले नेपाल नरेश अब नारायणहिटी राजमहल में कैदी की तरह सिकुड़ गए हैं| यह करिश्मा अगर किसी अन्य देश में हुआ होता तो पहले खून [...]

Posted by: on: April 5 2007 • Categorized in: Articles

रा. सहारा, 5 अप्रैल 2007 : नेपाल राजनीति की अद्रभुत प्रयोगशाला बन गया है| वहाँ असंभव भी संभव हो रहा है| दो साल पहले तक कौन सोच सकता था कि माओवादी और लोकतंत्र्वादी एक ही थाल में जीम सकते हैं| जो लोग दस साल तक आपस में लड़े और जिनके कारण 13 हजार लोग मौत [...]

Posted by: on: January 6 2006 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा, 6 जनवरी 2006 : नेपाल के माओवादियों ने फिर पुरानी राह पकड़ ली है| चार माह से चले आ रहे संघर्ष-विराम को उन्होंने समाप्त घोषित कर दिया है| उन्होंने न तो संयुक्तराष्ट्र, न नेपाल के राजनीतिक दलों और न ही भारत सरकार के अनुरोध को स्वीकार किया| वे अब मनमानी पर उतर आए [...]

Posted by: on: May 17 2005 • Categorized in: Articles

Nai Dunia, 17 May 2005 : नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र को हुआ क्या है? वे कितने दुश्मन एक साथ खड़े कर रहे हैं?  नेपाल के माओवादियों और लोकतंत्रवादियों से तो वे पहले से ही जूझ रहे हैं| अब उन्होंने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि भारत भी उनके विरुद्घ हो जाए| भारत जैसा  आदर्श पड़ौसी [...]

Posted by: on: April 28 2005 • Categorized in: Articles

नवभारत टाइम्स, 28 अप्रैल, 2005 : किसे पता था कि भारत सरकार इतनी जल्दी पल्टा खा जाएगी| पल्टा खाने पर सरकारें अक्सर झेंपने लगती हैं लेकिन यहॉं झेंपने लायक कुछ नहीं है| जकार्ता में नेपाल और बांग्लादेश के प्रति भारत ने अपनी नीति में जो परिवर्तन किया है, वह भारत की कमजोरी नहीं, समझदारी है| [...]

Posted by: on: February 22 2005 • Categorized in: Articles

R Sahara, 22 Feb 2005 : आपात्काल कहीं भी थोपा जाए, भारत में या नेपाल में, उसका डटकर विरोध होना चाहिए| इसीलिए नेपाल के आपात्काल का वह पार्टी भी विरोध कर रही है, जिसने खुद भारत में कभी आपात्काल थोपा था| भारत का आपात्काल नेपाल के आपात्काल से ज्यादा बुरा था, क्योंकि यहॉं वह एक [...]

Slideshow