Naya India, 23 Sept 2003 : अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति प्रो. बुरहानुद्दीन रब्बानी की हत्या से अफगानिस्तान में चल रहे शांति-प्रयासों को गहरा धक्का लगेगा| वे अफगानिस्तान के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे| वे सिर्फ राष्ट्रपति ही नहीं रहे, उन्होंने लगभग 20 साल तक मुजाहिदीन-संघर्ष का भी नेतृत्व किया था| वे पठान नहीं [...]
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Dainik Bhaskar, 23 March 2010 : जन्म शताब्दियां तो कई नेताओं की मन रही हैं, लेकिन प्रश्न यह है कि स्वतंत्र भारत में क्या राममनोहर लोहिया जैसा कोई और नेता हुआ है? इसमें शक नहीं कि पिछले 63 सालों में कई बड़े नेता हुए, कुछ बड़े प्रधानमंत्री भी हुए, लेकिन लोहिया ने जैसे देश हिलाया, [...]
जनसत्ता, 16 जनवरी 2008 : 27 दिसंबर की शाम 6 बजे के आस-पास ! भोपाल का राजभवन ! श्री बलराम जाखड़ और मैंने ज्यों ही चाय के प्याले अपने मुह से लगाए, उनके एडीसी ने हड़बड़ाते हुए बताया कि बेनज़ीर भुट्टो की हत्या हो गई ! मैं अवाक रह गया ! मेरी ऑंखें डबडबा गईं| [...]
नवभारत टाइम्स, 12 जनवरी 2006 : वृंदा कारत ने किसका भला किया? न खुद का, न मजदूरों का, न देश का, न आयुर्वेद का, न मार्क्सवादी पार्टी का! हर दृष्टि से उनका अभियान गलत साबित हो रहा है| वृंदाजी ने पहले इतने सही मुद्दों पर लड़ाइयाँ लड़ी हैं कि जब उन्होंने स्वामी रामदेव के खिलाफ [...]
नवभारत टाइम्स, 29 जून 2005 : क्या यह जरूरी है कि मोहम्मद अली जिन्ना को हम देवता मानें या दानव ! देव और दानव के परे क्या कोई अन्य श्रेणी नहीं है, जिसमें गांधी, जिन्ना और सावरकर जैसे लोगों को रखा जा सके? क्या अपने इतिहास के प्रति हम थोड़े निस्संग, थोड़े निष्पक्ष, थोड़े तटस्थ हो [...]
Sahitya Amrit, 2005 : विद्यानिवासजी अपने ढंग के अनूठे आदमी थे| अब सोचता हॅूं कि अपने मित्र-मंडल में क्या उनके-जैसा कोई दूसरा है? कोई नहीं है| उनका व्यक्तित्व अनेक उत्कट विरोधाभासों का समागम था वे जितने पारम्परिक थे, उतने ही आधुनिक भी थे| सत्ता के प्रति उनमें जितनी हिकारत थी, उतनी ही ललक भी थी| [...]
दैनिक भास्कर, 25 दिसम्बर, 2004 : नरसिंहरावजी से अधिक अभागा प्रधानमंत्री कौन रहा होगा? लोग उन्हें न तो जीते जी समझ पाए और न ही मरने के बाद| वे एक अबूझ पहेली थे| उनके बारे में क्या-क्या छवियाँ बनी हुई हैं| मौनी बाबा, अकर्मण्य -दीर्घसूत्री, भ्रष्टाचार-पे्रमी, निर्मम, कुटिल आदि-आदि! प्रधानमंत्रियों को जो सम्मान मिलता है, [...]
R Sahara, 2 Nov. 2003 : पांडुरंग शास्त्री आठवले को गुजरात और महाराष्ट्र ने जितने नजदीक से जाना है, भारत के अन्य प्रांतों ने नहीं जाना लेकिन वे ऐसे महापुरुष थे, जिन्हें भारत ही नहीं, सारे संसार को जानना चाहिए था| पिछले पचास वर्षों में उन्होंने खास तौर से गुजरात और महाराष्ट्र में जैसा सामाजिक [...]
R Sahara, 7 Sept 2003: महान गुजराती क्रांतिकारी पंडित श्यामजी कृष्ण वर्मा को लेकर आजकल जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है| जिन्हें श्यामजी का पूरा नाम भी ठीक से पता नहीं, वे भी लेख और बयान ठोके चले जा रहे हैं | कोई उन्हें वामपंथी बता रहा है तो कोई दक्षिणपंथी ! क्या आपने दुनिया में [...]
NavBharat Times, 9 March 2003 : भारत के स्वाधीनता संग्राम में सावरकर को हम सही स्थान क्या देंगे, अभी तक तो सेन्ट्र्रल हाल में उनके चित्र को लेकर ही कोहराम मचा हुआ है| सावरकर के चित्र के विरुद्घ सोनिया ने राष्0पति को पत्र तो लिखा दिया लेकिन तब तक उन्हें पता नहीं था कि उनकी [...]
नवभारत टाइम्स, 3 मार्च 2003: सावरकर कोई मामूली क्रांतिकारी नहीं थे| उन्हें 27 साल की आयु में 50-50 साल की दो सजाऍं हुई थीं| अंडमान-निकोबार तथा रत्नागिरी में उन्होंने 27 साल की जेल और नज़रबंदी भुगती| क्या दुनिया का कोई और क्रांतिकारी है, जिसने इतना लम्बा कारावास भुगता हो ? अगर 25 साल जेल में [...]