Dainik Hindustan, 23 December 2010 : इस साल पांचों महाशक्तियों के नेता भारत आए, लेकिन रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने सबको पीछे छोड़ दिया। वे सबसे बाद में आए, लेकिन वे सबसे आगे रहे। उन्होंने भारत की हर राजनीतिक शिकन की चिंता की और उसको दूर करने में सहयोग का वादा किया। जो बातें [...]
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Dainik Hindustan, 27 Nov 2010 : लिस्बन में हुआ नाटो, रूस और अफगानिस्तान का शिखर सम्मेलन विश्व राजनीति पर अपना गहरा प्रभाव छोड़े बिना नहीं रहेगा। यदि इस सम्मेलन में रूस और अफगानिस्तान भाग नहीं लेते तो भी यह महत्वपूर्ण होता, क्योंकि इसमें यूरोप के 27 देशों के अलावा अमेरिका की भी भागीदारी होती, लेकिन [...]
Dainik Hindustan, 16 March 2010 : रूसी प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन की इस भारत-यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नया आयाम दे दिया है। ख्रुश्चेव, बुल्गानिन और ब्रेझनेव का युग न तो अब लौट सकता है और न ही इस बहुध्रुवीय विश्व में अब उसकी जरूरत है लेकिन भारत-रूस संबंधों में अचानक जो ठंडापन आ गया था, उनमें [...]
Dainik Bhaskar, 11 Dec 2009 : प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह की मास्को-यात्रा की तुलना यदि उनकी वाशिंगटन-यात्रा से और ओबामा की पेइचिंग-यात्रा से कीजाए तो माना जाएगा कि यह मास्को-यात्रा अधिक सगुण और अधिक सार्थक रही है| इस मास्को-यात्र का कोई खास शोर-शराबा नहीं था, जैसा कि उल्लिखत दोनों यात्रओं का था लेकिन इस यात्रा में से जैसे समझौते और दिशा-निर्देश निकले हैं, वे सिर्फ भारत-रूस संबंधों में ही [...]
रा. सहारा, 13 अगस्त 2008 : रूस ने जॉर्जिया को रौंद डाला लेकिन अन्तरराष्ट्रीय समुदाय में कोई खास शोर-शराबा नहीं है| ज़रा तुलना करें| इसी सोवियत रूस ने 1954 में हंगारी, 1968 में चेकोस्लावाकिया और 1979 में अफगानिस्तान में भी फौजी कार्रवाई की थी| इन कार्रवाइयों के वक्त सारी दुनिया में हंगामा हो गया था| [...]
जनसत्ता, 19 फरवरी 2008 : फारसी में कहते हैं, ‘देर आयद, दुरूस्त आयद’| संस्कृत में कहते हैं, पश्चबुद्घि ! याने देर से आई अक़ल ! हमारी सरकार नवंबर में गच्चा खा गई थी| अब उसे अक्ल आ गई है| रूसी प्रधानमंत्री विक्तोर झुबकोव की दिल्ली यात्र के दौरान उसने ‘भूल-सुधार’ कर लिया है| अब से [...]
राष्ट्रीय सहारा, 19 फरवरी 2007 : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के म्युनिख-भाषण ने विश्व राजनीति में खलबली मचा दी है| क्या पुतिन के इस भाषण की तुलना विंस्टन चर्चिल के प्रसिद्घ फुल्टन-भाषण से की जा सकती है ? चर्चिल के भाषण को शीतयुद्घ का बीज-भाषण माना जाता है| क्या पुतिन का म्युनिख-भाषण नए शीतयुद्घ का [...]
रा. सहारा, 29 जनवरी 2007 : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यह भारत-यात्र भारतीय विदेश नीति और विश्व राजनीति, दोनों को नई दिशा दे रही है| इस अजूबे का मूल कारण है, रूस में पैदा हुई अपूर्व समृद्घि और स्थायित्व| सोवियत संघ के भंग होते ही येल्तसिन का रूस अचानक बूढ़ा और बीमार हो गया [...]
राष्ट्र्रीय सहारा, 11 दिसंबर 2005 : प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह की मास्को-यात्र खाली वार्षिक कर्मकांड बनकर रह जा सकती थी, जैसे कि पिछले साल रूसी राष्ट्र्रपति ब्लादिमीर पूतिन की दिल्ली-यात्र रही लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री की इस यात्र ने अनेक छोटे-मोटे लक्ष्य सिद्घ किए| पहले राजनीतिक लक्ष्यों को ही लें| सबसे पहला लक्ष्य तो ईरान का [...]
राष्ट्रीय सहारा, 31 मई 2005 : पिछले हफ्ते घटी एक घटना पर दुनिया का बहुत कम ध्यान गया| वह घटना थी-बाकू-तिबिलिसी-सीहान- पाइपलाइन की स्थापना ! कुछ देशों के बीच तेल या गैस की पाइपलाइन बिछ जाए तो क्या वह इतनी बड़ी घटना हो जाती है कि राजनीतिक विश्लेषकों को उस पर ध्यान देना चाहिए? जी [...]
Nav Bharat Times, 3 March 2005 : पिछले हफ्ते ब्रातिस्लावा में हुई जॉर्ज बुश और व्लादिमीर पूतिन की मुलाकात यदि असफल हो जाती तो अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में काफी खलल पैदा हो सकता था| उसका असर सिर्फ मध्य एशिया के पुराने सोवियत गणतंत्रों पर ही नहीं पड़ता, ईरान, अफगानिस्तान, एराक़ और फलस्तीन जैसे मुद्दे भी प्रभावित [...]
Bhaskar, March 2004 : इस हफ्ते यूरोप में दो महत्वपूर्ण चुनाव हुए, जिनका प्रभाव विश्व राजनीति पर पड़े बिना नहीं रहेगा| रूस में व्लादीमीर पूतिन और स्पेन में समाजवादी पार्टी के नेता जोस लुइस रोडि्रग्ज़ ज़पातेरो की विजय हुई| चुनाव जीतते ही दोनों ने अमेरिका पर तीर चलाए| पूतिन ने अमेरिकी विदेश मंत्री कोलिन पॉवेल [...]
R Sahara, 25 Nov 2003 : भारत के प्रति रूस का रवैया क्या है, यह समझना दो घटनाओं के कारण जरा मुश्किल हो गया था| पहली मुशर्रफ की मास्को-यात्रा और दूसरी व्लादिमीर पूतिन का अन्तरराष्ट्रीय इस्लामी सम्मेलन में भाग लेना| इन दोनों घटनाओं के संकेत ये थे कि रूस पाकिस्तान के प्रति नरम पड़ता जा [...]
Dainik Bhaskar, 17 Nov 2003 : पहली बार ऐसा लग रहा है कि भारत-रूस मैत्री की गाड़ी दुबारा पटरी पर आ रही है| अब से 12 साल पहले बोरिस येल्तसिन के जमाने में जो पटरी से उतरी तो यह गाड़ी सम्हल ही नहीं पा रही थी| राष्ट्रपति व्लादिमीर पूतिन के दो-दो बार भारत आने के [...]
Nav Bharat Times, 11 Feb 2003: जनरल परवेज़ मुशर्रफ की मास्को-यात्रा पर भारतीय अखबारों में ज्यादा शोर नहीं मचा, इसका मतलब यह नहीं कि वह ध्यान देने लायक नहीं है| ज्यादा शोर न मचे, इसका ध्यान रूस और पाकिस्तान, दोनों ने पहले से ही रखा हुआ था| राष्ट्रपति व्लादिमीर पूतिन ने मुशर्रफ के मास्को पहुँचने [...]
नवभारत टाइम्स, 07 दिसंबर 2002, दो साल पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भारत आए थे, तब भी उन्होंने आतंकवाद की भर्त्सना तो की थी लेकिन तब वे जरा ठिठके हुए दिखाई पड़ रहे थे| उन्होंने पाकिस्तान नामक शब्द को अपने होठों या कलम पर नहीं आने दिया था लेकिन इस बार संयुक्त वक्तव्य [...]
3 Dec. 2002 : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दूसरी बार भारत आए हैं| पिछली बार आने में और इस बार आने में काफी फर्क है| जब अक्तूबर 2000 में वे भारत आए थे, तब तक न न्यूयॉर्क का ट्रेड टॉवर गिरा था, न भारत की संसद पर आतंकवादी हमला हुआ था और न ही [...]