Posts Tagged 'विदेशनीति'

Posted by: on: August 3 2011 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 03 Aug 2011 : नए विदेश सचिव रंजन मथाई के इस संकल्प का स्वागत किया जाना चाहिए कि विदेश नीति में उनकी प्राथमिकता भारत के पड़ौसियों पर रहेगी। यही प्राथमिकता पिछले दो-तीन विदेश सचिवों की भी रही है लेकिन क्या कारण है कि पड़ौसी राष्ट्रों पर इतना ध्यान देने के बावजूद भारत की गाड़ी [...]

Posted by: on: July 1 2009 • Categorized in: Articles

Jansatta, 1 July 2009 : डॉ. मनमोहन सिंह अपनी विदेश नीति में कोई क्रांतिकारी परिवर्तन करें, ऐसी परिस्थितियां अभी पैदा नहीं हुई हैं लेकिन यह निश्चित है कि उनकी विदेश नीति के पिछले पांच सालों के मुकाबले अगले पांच साल काफी भिन्न होंगे| डॉ. मनमोहनसिंह की नई सरकार के लिए इस बार विदेश नीति की [...]

Posted by: on: June 18 2009 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा, 18 जून 2009 : दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने जो पहली विदेश-यात्र की, उसने एक साथ कई लक्ष्य साधे| यों तो वे सिर्फ दो दिन के लिए रूस के शहर येकातिनबर्ग गए थे लेकिन उन्होंने दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों की शिखर बैठक में भाग लिया और चीन, पाकिस्तान, कज़ाकिस्तान [...]

Posted by: on: September 9 2008 • Categorized in: Articles

NavBharat Times, 9 Sept. 2008 : विएना में हुई विजय पर भारतसरकार यदि इतरा रही है तो इसमें गलत क्या है? इतना बड़ा कूटनीतिक युद्ध भारत ने इसके पहले कभी नहीं लड़ा। चीन और पाकिस्तान के साथ हुए युद्धों के समय हमारा विदेश मंत्रालय विशेष सक्रिय होता था और संयुक्त राष्ट्र में पश्चिमी राष्ट्रों का मुकाबला करता था। [...]

Posted by: on: October 6 2007 • Categorized in: Articles

NavBharat Times, 06 Oct 2007 : भारत क्या करे? अपने राष्ट्रहितों की रक्षा करे या पड़ोसी देशों में लोकतंत्र की रक्षा करे? अपना राष्ट्रहित बड़ा है या दूसरों कालोकतंत्र? भारत के चारों तरफ लोकतंत्र लहूलुहान हुआ पड़ा है और भारत ने अपने होंठ सिले हुए हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत का दुखड़ा यह है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश [...]

Posted by: on: February 23 2005 • Categorized in: Articles

Nav Bharat Times, 23 Feb 2005 : विदेश सचिव श्याम सरन न तो विदेश मंत्री हैं और न ही विदेश नीति-विचारक ! उनसे यह आशा करना उचित नहीं कि वे भारतीय विदेश नीति का कोई सिद्घांत प्रतिपादित करेंगे| 14 फरवरी को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में उन्हें सुनने को जैसी भीड़ जुटी थी, वह यह मानकर [...]

Posted by: on: December 31 2004 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा,   31 दिसम्बर, 2004  :

Posted by: on: February 13 2002 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 13 फरवरी 2002 : पिछले कुछ हफ्ते भारतीय विदेश नीति के लिए बहुत चुनौतीभरे रहे हैं| इस तरह की चुनौती का समय अब से ठीक 22 साल पहले भी आया था| अफगानिसतान पर रूसी कब्ज़े के बाद जनवरी-फरवरी 1980 में दुनिया के महत्वपूर्ण देश यह जानना चाहते थे कि भारत किधर है, रूस [...]

Posted by: on: February 11 2002 • Categorized in: Articles

नभाटा,11 फरवरी 2002 :  

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