Posts Tagged 'श्रीलंका'

Posted by: on: April 16 2010 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा, 16 अप्रैल 2010 : श्रीलंका के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति महिंद राजपक्ष के गठबंधन को प्रचंड विजय मिली है| जनवरी में उन्होंने राष्ट्रपति का चुनाव जीता और अब संसद पर भी उनका वर्चस्व कायम हो गया है| 225 सदस्यों की संसद में उन्हें दो-तिहाई बहुमत मिल जाता, अगर उन्हें पांच सीटें और भी [...]

Posted by: on: January 29 2010 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा, 29 जनवरी 2010 | श्रीलंका में राष्ट्रपति का चुनाव बहुत ही नीरस होनेवाला था लेकिन अचानक सारी दुनिया की नज़रें उस पर गड़ गइंर्| तमिल उग्रवादियों का समूल-नाश करनेवाले राष्ट्रपति महिंद्र राजपक्ष की विजय इतनी एकतरफा और प्रचंड होती कि वह अपने आप में एक मिसाल बन जाती लेकिन इसी डर से सारे [...]

Posted by: on: January 28 2009 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 28 Jan 2009 : मुल्लैतिवू के पतन ने लिट्टे की कमर तोड़ दी है| प्रभाकरन के छापामार उसी तरह इतिहास के विषय बन जाऍंगे, जैसे कि खालिस्तानी आतंकवादी बन गए हैं| श्रीलंका की वर्तमान स्थिति पर बाइबिल का वह कथन लागू हो रहा है कि जो तलवार से उपर चढ़े थे, वे तलवार [...]

Posted by: on: January 16 2009 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा, 16 जनवरी 2009 : पहले किलिनोचई, फिर एलीफेंट पास और अब जाफना ! अब लिट्टे के पास रह क्या गया है ? उसके सारे गढ़ गिर गए हैं| अब वन्नी के जंगलों के अलावा उसका कोई ठौर नहीं बचा है| उन जंगलों में भी वह कितने दिन छुपा रहेगा| मौत ने उसे चारों [...]

Posted by: on: October 24 2008 • Categorized in: Articles

दै. भास्कर, 24 अक्टूबर 2008 : श्रीलंका एक बार फिर भारत के लिए चुनौती बन गया है| कोई विदेशी मामला भारत को कैसे दुविधा में फंसा देता है, इसका उदाहरण यह संकट है| श्रीलंका की सरकार ने अगर लिट्टे के मुख्यालय को घेर लिया है और वह तमिल आतंकवादियों का सफाया करनेवाली है तो इससे [...]

Posted by: on: November 25 2005 • Categorized in: Articles

नवभारत टाइम्स, 25 नवम्बर 2005 : कांटों भरा ताज किसे कहते हैं, यह देखना हो तो श्रीलंका के राष्ट्र्रपति को देखें, जो मुश्किल से 2 प्रतिशत वोटों से जीते हैं| महिंद राजपक्ष को रनिल विक्रमसिंघ के मुकाबले सिर्फ एक लाख 80 हजार वोट ज्यादा मिले हैं| जीतनेवाले को 48 लाख 87 हजार और हारनेवाले को [...]

Posted by: on: December 24 2004 • Categorized in: Articles

NavBharat Times, 24 Dec 2004: भारत और श्रीलंका के संबंध इस समय जितने अच्छे हैं, शायद पहले कभी नहीं रहे। इतने अनुकूल वातावरण में श्रीलंका की यात्रा सार्थक और सुखद ही रह सकती है। अब से 21 साल पहले वहां के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के मुख से इंदिराजी के विरुद्ध मैंने इतनी कटु उक्तियों को [...]

Posted by: on: April 10 2004 • Categorized in: Articles

R Sahara, 10 April 2004 : अच्छा हुआ कि श्रीलंका में चमत्कार नहीं हुआ| अगर हो जाता तो सारा मामला काफी बिगड़ सकता था| चमत्कार याने चंदि्रका कुमारतुंग की श्रीलंका फ्रीडम पार्टी को यदि स्पष्ट बहुमत मिल जाता तो श्रीलंका के तमिलों की  शामत आ जाती| चंदि्रका  राष्ट्रपति के रूप में तमिलों के प्रति अपेक्षाकृत [...]

Posted by: on: April 10 2004 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा,  10 अप्रैल 2004:

Posted by: on: November 17 2003 • Categorized in: Articles

Nav Bharat Times, 17 Nov 2003 : यह गनीमत है कि श्रीलंका में खून की नदियॉं नहीं बहीं| ऐसा नहीं है कि वहॉं सिर्फ सिंहलों और तमिलों के बीच ही तलवारें खिंचती हैं| कई बार सिंहलों और सिंहलों के बीच इतना उत्पात मचता है कि वह भारत की चिन्ता का विषय बन जाता है| 1971 [...]

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