R Sahara, 25 March 2005 : विनोबा भावे की प्रेरणा से 1975 में नागरी लिपि परिषद् की स्थापना हुई थी| 1974 में विनोबाजी ने वर्धा में देश के चुने हुए हिंदीप्रेमियों का सम्मेलन किया था, उसमें जैनेद्रजी, भवानी बाबू, श्री मन्नारायणनजी, प्रो. शेरसिंह, शंकरदयालसिंहजी आदि अनेक सज्जन थे| उनमें सबसे छोटा मैं ही था| परिषद् [...]
Posts Tagged 'हर हफ्ते'
R Sahara, 25 Feb 2005 : अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई तीसरी बार भारत आए| चार साल में तीन बार कोई भी अफगान नेता कभी भारत नहीं आया| भारत के प्रधानमंत्री को अफगानिस्तान गए 35 साल से भी ज्यादा हो गए| हामिद करज़ई आधुनिक अफगानिस्तान के ढाई सौ साल के इतिहास में पहले राष्ट्राध्यक्ष हैं, [...]
Nav Bharat Times, 23 Feb 2005 : विदेश सचिव श्याम सरन न तो विदेश मंत्री हैं और न ही विदेश नीति-विचारक ! उनसे यह आशा करना उचित नहीं कि वे भारतीय विदेश नीति का कोई सिद्घांत प्रतिपादित करेंगे| 14 फरवरी को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में उन्हें सुनने को जैसी भीड़ जुटी थी, वह यह मानकर [...]
R Sahara, 6 Feb 2005 : अहिंसा ग्राम शब्द से ऐसी ध्वनि निकलती है मानो यह कोई गॉंधीवादी या सर्वोदय आश्रम हो लेकिन यह कोरा आश्रम नहीं है| रतलाम में इस हफ्ते जिस अहिंसा ग्राम का उद्घाटन हुआ है, वह आश्रम भी है, ‘कम्यून’ भी है, यूटोपिया भी है, कार्यशाला भी है और सच पूछा [...]
R Sahara 23 Jan 2005 : हिंदी को आजकल अपच हो रहा है। टी वी चैनलों और कुछ अखबारों की मेहरबानी के कारण । हर हिंदी वाक्य में अटपटे अंग्रेजी शब्दों को घुसा दिया जाता है। भाषाएँ नए-नए शब्दों को स्वीकार करें तो उनका हाजमा जरुर बढ़ता है लेकिन नए के नाम पर बेढब, अनगढ़ [...]
R Sahara, 21 Nov 2004 : क्या सिरदर्द का इलाज रसगुल्लों से हो सकता है? शायद हो सकता है| हॉं सिर्फ रसगुल्लों से, दवा से नहीं| इसीलिए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह ने कश्मीरियों के मॅुंह में 24000 करोड़ रु. का रसगुल्ला रख दिया है| इस तरह के रसगुल्ले देवेगौड़ा और वाजपेयी जैसे प्रधानमंत्रियों ने भी रखे [...]
राष्ट्रीय सहारा, 14 नवम्बर 2004 : देश में कोई बड़े से बड़ा राजनेता गिरफ्तार हो जाए तो भी किसी को सदमा नहीं पहुंचता लेकिन अगर किसी धर्मध्वजी पर उंगली भी उठती है तो लोग बेचैन हो जाते हैं| कॉंची कामकोटि के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी ऐसा ही सदमा है| गिरफ्तारी और लंबे मुकदमों [...]
R Sahara, Dec 2003: स्वामी धर्मबंधु के आग्रह पर एक दिन के लिए प्रांसला नामक गॉंव में गया| प्रांसला गुजरात के राजकोट जिले में है| गॉंधीजी का जिला| प्रांसला पोरबंदर से 80 कि.मी. है और राजकोट उससे आगे 100 कि.मी. की दूरी पर है| 16 घंटे में से 14 घंटे जहाज और कार में बिताए| [...]
R Sahara, Dec 2003 : नेताओं की जैसी निंदा मुख्य चुनाव आयुक्त जे.एम. लिंग्दोह ने की है, क्या कभी कोई पदासीन व्यक्ति करता है ? ऐसी निंदा तो उच्चतम न्यायालय ने भी कभी नहीं की| माना जा सकता है कि लिंग्दोह ने अपने पद की मर्यादा का ध्यान नहीं रखा और अतिरेकपूर्ण उपमा दे डाली [...]
R Sahar, Dec 2003: जनरल परवेज़ मुशर्रफ के मुंह से निकली बात अगर सही है तो मानना पड़ेगा कि पाकिस्तान अपने पचास साल पुराने पिंजरे से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है| ‘रायटर’ को दी भेंट में मुशर्रफ ने कश्मीर पर संयुक्तराष्ट्र के प्रस्ताव को अलग रखने की बात कही है| कश्मीर के रेकॉर्ड [...]
R Sahara, Dec 2003 : पॉच राज्यों के चुनाव-परिणाम आने के बाद जिस सोनिया गॉंधी को कई समीक्षक ‘गॅूगी गुडि़या’ कहने लगे थे, उसे सोनिया गॉंधी ने आज एक अन्तरराष्ट्रीय समारोह में अचानक पूछे गए टेढ़े-मेढ़े सवालों के सटीक जवाब देकर श्रोताओं का मन मोह लिया| तथाकथित ‘गॅूंगी गुडि़या’ ने अपने आपको ‘मनमोहक गुडि़या’ सिद्घ [...]
R Sahara, 23 Nov 2003 : क्या अपने देश में कोई ऐसा नेता है, जो यह कहे कि मैं दिलीपसिंह जू देव नहीं हॅूं ? पिछले 45 वर्षों में देश के लगभग हर महत्वपूर्ण नेता से मेरा सम्पर्क रहा है,च लेकिन आज तक मैं ऐसे किसी नेता को नहीं जानता जो अपनी राजनीति और अपनी [...]
R Sahara, 16 Nov 2003: पिछले कुछ माह से मुझे ऐसा लग रहा था कि सिर्फ भाषण देना और लेख लिखना बेकार-सा काम है| विचारों का न तो श्रोताओं पर कोई असर होता है और न ही पाठकों पर ! लेकिन इस हफ्ते हुई हैदराबाद-यात्रा ने मेरी निराशा को आशा में बदल दिया| स्वामी इन्द्रवेश, [...]
R Sahara, 9 Nov 2003 : अंग्रेजी अखबार जिस अफगान सुंदरी का नाम ‘वीदा समदजई’ लिख रहे हैं, उसके नाम का शुद्घ उच्चारण वेदा होना चाहिए| अफगानिस्तान में कई लोग अपनी बेटियों का नाम वेदा और अवेस्ता भी रखते हैं| काबुल विश्वविद्यालय के पूर्व उप-कुलपति डॉ. अहमद जावेद की दोनों बेटियों के नाम यही थे [...]
R Sahara, Oct 2003 : स्विस महिला राजनयिक के साथ हुए बलात्कार की जितनी निन्दा की जाए कम है लेकिन यह भी विचारणीय है कि क्या इस तरह की खबरें मुखपृष्ठ पर आठ-आठ कॉलम में छापी जानी चाहिए| उस दिन के दिल्ली के कुछ अखबार देखकर ऐसा लग रहा था मानो दिल्ली पर कोई पाकिस्तानी [...]
R Sahara 21 Sept 2003 : सारी दुनिया में शेर अपनी पूंछ को हिलाता है लेकिन पश्चिम एशिया में पूंछ अपने शेर को हिला रही है| पूंछ है, इस्राइल और शेर है, अमेरिका | सुरक्षा परिषद में जब यासर अराफात की हत्या के विरुद्घ प्रस्ताव आया तो अमेरिका ने उस पर वीटो (निषेधाधिकार) का प्रयोग [...]
R Sahara, 31 Aug 2003 : अब से ठीक सोलह माह पहले ! 28 फरवरी 2002 ! दिल्ली का हैदराबाद हाउस, जहॉं प्रधानमंत्री की दावतें होती हैं| अफगानिस्तान के राष्ट्र्रपति हामिद करज़ई के सम्मान में दावत थी | जैसे ही अतिथिगण भोज-कक्ष में घुसे, प्रधानमंत्री से आमना-सामना हुआ | मैंने पूछा ‘करज़ई को हमने क्या-क्या [...]
R Sahara, 24 Aug 2003 : प्रसिद्घ नृत्यांगना उमा शर्मा ने जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में कृष्ण-लीला पर नृत्य-नाटिका आयोजित की | इंडिया इंटरनेशनल सेंटर का हाल खचाखच भरा हुआ था | हम ठीक समय पर पहॅुचे लेकिन कुर्सी खाली नहीं थी | कोई बात नहीं | आगे जाकर मैं और मेरी पत्नी ज़मीन पर ही [...]
R Sahara, 17 Aug 2003 : मुसलमानों की संस्कृत-सेवा और हिन्दी-सेवा को लेकर दिल्ली में पिछले हफ्रते दो महत्वपूर्ण कार्यक्रम हुए ! जवाहरलाल नेहरू वि वि के विशिष्ट संस्कृत अध्ययन केंद्र ने मुसलमानों की संस्कृत-सेवा पर डॉ मोहम्मद इस्माइल खान और मुझे बोलने के लिए कहा और डॉ म्लिक मुहम्मद की पुस्तक हिन्दी की [...]
R Sahara, 10 Aug 2003 : प्रसार भारती को आजकल पैसे की चिंता बहुत सता रही है ! उसके वित्त-सदस्य ने बोर्ड के गले यह बात उतार दी है कि यदि अ-हिन्दी क्षेत्रों में हिन्दी कार्यक्रम दिखाए जाऍंगे तो दूरदर्शन को विज्ञापन नहीं मिलेंगे और इसी कारण अब भी नहीं मिल रहे हैं ! इसीलिए [...]