Bhaskar, 03 Feb 2009 : योगासनों के विरूद्घ मुल्ला और मौलवी फतवे जारी नहीं करेंगे तो कौन करेगा ? मुल्ला-मौलवी, महंत-मठाधीश, पोप-पादरी बने ही इसलिए हैं कि वे धर्म के नाम पर चाबुक फटकारते रहें| वे सदियों से चाबुक फटकार रहे हैं| उन्होंने किस-किस की खाल नहीं उधेड़ी ? राजा-महाराजा, आस्तिक-नास्तिक, भगत-जगत, किंचन-अकिंचन-कोई नहीं बचा, [...]
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दैनिक भास्कर, 8 अक्टूबर 2008 : अगर यह हिंदुत्व है तो इससे अधिक शर्मनाक क्या हो सकता है ? कौनसे हिंदू धर्मग्रंथ में लिखा है कि निहत्थों की हत्या करो, भिक्षुणी से बलात्कार करोद्व गर्भवती स्त्रियों के पेट चीरो, अनाथ बच्चों के गले काट दो और बूढ़ों की हडि्रडयों तोड़ दो ? हिंदुत्व के नाम [...]
रा. सहारा, 2 सितंबर 2008 : अगर चोरी और सीनाज़ोरी की कोई मिसाल ढूंढना चाहे तो उसे कंधमाल जाना चाहिए| कंधमाल उड़ीसा का वह स्थान है, जहाँ 84 वर्षीय लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके चार भक्तों की निर्मम हत्या कर दी गई| 20 बंदूकधारियों ने आश्रम में घुसकर यह अपराध कियाद्व और वे आज तक पकड़े [...]
नवभारत टाइम्स, 3 जनवरी 2003 : भारत का प्रधानमंत्री क्या करे ? वह अपना पिण्ड कैसे छुड़ाए ? हिंदुत्व को भारतीयता और भारतीयता को हिंदुत्व बता देना सबसे सरल रास्ता है लेकिन सरल रास्ते पर भी संघ और विहिप ने काँटे बिछा दिए हैं| वे अटलजी को उनकी पुरानी कविताओं की याद दिला रहे हैं| [...]
राष्ट्रीय सहारा, 1 दिसंबर 2002 : उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने ऐसा काम कर दिया, जो प्राय: नेता लोग नहीं करते| उन्होंने देश के सोचने-विचारने वाले लोगों को बड़ी मुसीबत में डाल दिया है| हिन्दुत्वादी उन्हें छद्म-हिन्दू कह रहे हैं तो सेक्यूलरवादी उन्हें छद्म-सेक्यूलर! श्री आडवाणी ने ऐसा क्या कह दिया है कि उन्हें दोनों तरफ [...]