नया इंडिया, 17 सितंबर 2011 : नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी, दोनों को अमेरिकी विशेषज्ञ एक ही डंडे से हांक रहे हैं| दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है| दोनों को वे अभी से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर रहे हैं| मानो कि जैसे यह चुनाव अमेरिका के राष्ट्रपति का हो, न कि भारत के [...]
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Nav Bharat Times, 17 Dec 2002 : गुजरात में जैसी प्रचंड विजय भाजपा को मिली, वैसी पिछले कई दशकों में किसी पार्टी को नहीं मिली| भाजपा-जैसी पार्टी में कोई प्रांतीय नेता नरेन्द्र मोदी की तरह राष्ट्रीय स्तर पर उभरा हो, यह भी अपूर्व है| फिर भी यह प्रश्न क्यों कि गुजरात में कौन जीता ? [...]
नवभारत टाइम्स, 07 दिसंबर 2002, दो साल पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भारत आए थे, तब भी उन्होंने आतंकवाद की भर्त्सना तो की थी लेकिन तब वे जरा ठिठके हुए दिखाई पड़ रहे थे| उन्होंने पाकिस्तान नामक शब्द को अपने होठों या कलम पर नहीं आने दिया था लेकिन इस बार संयुक्त वक्तव्य [...]
3 Dec. 2002 : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दूसरी बार भारत आए हैं| पिछली बार आने में और इस बार आने में काफी फर्क है| जब अक्तूबर 2000 में वे भारत आए थे, तब तक न न्यूयॉर्क का ट्रेड टॉवर गिरा था, न भारत की संसद पर आतंकवादी हमला हुआ था और न ही [...]
नवभारत टाइम्स, 27 नवंबर 2002: जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने अपनी फौजी चेहरे पर लोकतंत्र का मुखौटा जमा लिया है| जमाली के ज़रिए जमा लिया है| मुस्लिम लीग (क़ायदे-आज़म) के नेता मीर जफरुल्ला खान जमाली को आखिरकार उन्होंने प्रधानमंत्री बनवा ही दिया| वे बनवाते, इसकी बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी| कोई भी प्रधानमंत्री अपने आप बन जाना चाहिए था| लेकिन [...]
दैनिक भास्कर, 23 नवंबर 2002, चीन की तुलना यूरोपीय विचारकों ने महादैत्य से की है| उनका कहना है कि यदि वह सोता है तो उसे सोने दो| यदि वह जाग गया तो वह दुनिया को हिला देगा| इस दैत्य ने कभी दुनिया को सचमुच हिला दिया था| चीनी क्रांति 1949 में हुई| लगभग तीन दशक [...]
R Sahara, 15 Nov. 2002 : पंचमढ़ी की काँग्रेस के मुकाबले माउंट आबू की काँग्रेस कितनी अलग है| माउंट आबू में न तो काँग्रेस महासमिति का अधिवेशन था और न ही कार्यसमिति की बैठक ! सिर्फ 14 राज्यों के काँग्रेसी मुख्यमंत्री वहाँ मिले थे लेकिन इस मिलन का महत्त्व किसी भी अधिवेशन से कम नहीं [...]
Nav Bharat Times, 14 Nov. 2002 : समझ में नहीं आ रहा कि इसे किसकी विजय कहा जाए ? सुरक्षा परिषद् की या अमेरिका की या एराक की ? या तीनों की ? सुरक्षा परिषद् ने अपना प्रस्ताव सर्वानुमति से पारित किया है| पन्द्रह में से एक राष्ट्र ने भी इस प्रस्ताव का विरोध नहीं [...]
Hindustan, 1 Nov 2002 : सबसे पहला प्रश्न तो यही है कि भाजपा-गठबंधन सरकार की उम्र क्या मानें ? तीन साल या साढ़े चार साल ? इस सरकार ने अक्तूबर में अपनी तीन-वर्षीय अवधि का उत्सव मनाया| प्रधानमंत्री लंदन में थे और रात देर से लौटनेवाले थे, इसलिए 13 अक्टूबर की शाम को ही उप-प्रधानमंत्री [...]
Nav Bharat, 29 Oct. 2002 : जयललिता ने धर्म-परिवर्तन विरोधी अध्यादेश जारी क्या किया, जैसे मुर्गियों के दड़बे में बिल्ली घुस गई | पादरी और मुल्ला इस क़दर चिल्ला रहे है, मानो क़यामत आ गई हो| विरोधी दल कह रहे हैं कि भाजपा की खुशामद का यह नायाब तरीका है| जयललिता अपने मुकदमे जीतना चाहती [...]
R Sahar, 23 Oct 2002 : मतवाद में फँसा आदमी कितना मतवाला हो जाता है, इसका प्रमाण हैं, प्रवीण तोगडि़या, जिन्होंने ‘इटली नी कूतरी’ शब्द का प्रयोग किया| अच्छा हुआ कि अंग्रेजी अखबार गुजराती नहीं जानते | वे इसका अनुवाद ‘इटली का कुत्ता’ कर रहे हैं| यह गलत अनुवाद उतना घातक नहीं है, जितना कि [...]
Dainik Bhaskar, 20 Oct 2002 : ज़रा तुलना करें, दो चुनावों की ! एक तो जो पाकिस्तान में हुआ और दूसरा, जो कश्मीर में हुआ| कश्मीरी चुनाव पर किसी ने भी उंगली नहीं उठाई| भारत-विरोधी तत्वों ने भी नहीं| उन्होंने केवल इतना ही कहा कि कई चुनाव-केन्द्रों पर मतदान लगभग शून्य रहा| यह तथ्य है| [...]
Jansatta, 20 Oct 2002 : मुसलमान आखिर कौन हैं, कैसे हैं, कहाँ से आए हैं, क्या करते हैं, क्या सोचते हैं, कैसे रहते हैं, गैर-मुस्लिमों से उनके रिश्ते कैसे हैं, उनके प्रति गैर-मुस्लिमों का रवैया क्या है, मुस्लिम जगत के प्रति उनका अपना रवैया क्या है, भारत और मुसलमान साथ-साथ रह सकते हैं या नहीं [...]
R Sahara, 15 Oct 2002 : चुनाव पाकिस्तान का हुआ और नुकसान भारत का ! पाकिस्तान का यह पहला चुनाव है, जिसमें मज़हबी पार्टियों को इतनी जबर्दस्त सफलता मिली है| पिछले पचपन साल में मज़हबी पार्टियों ने हज़ार पापड़ बेले लेकिन संसद में वे कभी दस-पाँच सीटों से ज्यादा नहीं जीत पाईं| इस बार संसद [...]
Nav Bhart Times, 12 Oct 2002: जम्मू-कश्मीर के चुनाव में पाकिस्तान साफ़-साफ़ हार गया | कैसे हार गया ? न तो उसने खुद चुनाव लड़ा और न ही पाकिस्तानपरस्त संगठनों ने| फिर भी वह इसलिए हार गया कि जम्मू-कश्मीर में न सिर्फ चुनाव सम्पन्न हो गए बल्कि निष्पक्ष और विधिवत हुए| यहाँ तक कि भारत-विरोधी [...]
NavBhart Times, 04 Oct 2002 : अक्षरधाम के सबक बहुत गहरे हैं| पहला सबक तो यही है कि अक्षरधाम और गोधरा जैसी घटनाओं को राज्य के निकम्मे नेतृत्व के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता| यदि अक्षरधाम को गोधरा की तरह नरेंद्र मोदी के हवाले कर दिया जाता तो इस बार क्रिया की प्रतिक्रिया इतनी भयंकर [...]
रा. सहारा, 2 अक्टूबर 2002 : गाँधी को गए 54 साल हो गए लेकिन आज भी किसी की हिम्मत नहीं कि उन्हें वह अपने समय का सबसे असफल आदमी कह दे| इतनी हिम्मत तो उन कम्युनिस्टों ने भी नहीं की, जो गांधी और नेहरू को गालियाँ देते नहीं थकते थे लेकिन श्री एस.एस.गिल ने अपनी [...]
NavBharat Times, 24 Sept. 2002 : भगवाकरण था कहाँ , जिस पर उच्चतम न्यायालय ने मुहर लगाई ? भगवाकरण अगर किया गया होता तो अब तक सभी वामपंथियों और गुलामपंथियों का विधवाकरण हो जाता| भाजपा-गठबंधन सरकार में इतनी हिम्मत कहाँ कि वह भगवाकरण कर सके| जो सरकार मंदिर, धारा 370, समान कानून जैसे मुद्दों से [...]
Nav Bharat, 12 Sept. 2002 : एराक पर अमेरिका हमला करे या न करे, उसने अपनी साख पर तो हमला बुलवा ही लिया है| दुनिया का कौनसा कोना है, जहाँ से अमेरिका पर हमला नहीं हो रहा है| अमेरिका के मित्र राष्ट्र भी कह रहे हैं कि राष्ट्रपति बुश ताकत के नशे में चूर हैं| [...]