R Sahara, 26 July 2006 : किसे गलत कहें ? इस्राइल को या हमास और हिजबुल्लाह को ? यह दुविधा सिर्फ मेरे जैसे मामूली लोगों की ही नहीं है, खुद लेबनान के प्रधानमंत्री, फलस्तीन के राष्ट्रपति, मिस्र, सउदी अरब और जोर्डन के शासकों, यूरोपीय नेताओं और भारत सरकार की भी है| अगर कोई दुविधा में [...]
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Jansatta, 23 July 2006 : पिछले दो हजार साल में भारत ने चीनियों को इतनी विद्याएँ, इतना धर्म, इतना दर्शन और इतना आचार-विचार सिखाया है कि अब हम उनसे कुछ सीखना चाहें तो इसमें हमारे आत्म-सम्मान को ठेस लगने का कोई प्रश्न नहीं उठता| पिछले तीन हफ्ते मैं चीन में रहा तो पहले 8-9 दिन [...]
दैनिक भास्कर, 6 मई 2006 : प्रमोद महाजन का महत्व क्या था, इसका पता इसी बात से पता चलता है कि भाजपा के अध्यक्ष राजनाथसिंह और लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी यात्रएं रद्द कर दीं और वे महाजन की अंत्योष्टि में उपस्थित हुए| प्रमोद के बिना भाजपा की कल्पना करना ही कठिन है| प्रमोद ने [...]
दैनिक भास्कर, 11 मार्च 2006 : ईरान और एराक के प्रति अमेरिकी नीतियाँ, बुश की भारत-यात्र और पैगंबर के कार्टूनों का कोई विरोध करे, इसमें ज़रा भी बुराई नहीं है| बुश- यात्रा का जमकर विरोध हीं होता तो भारत का बड़ा नुकसान हो सकता था| बुश का जितना विरोध हुआ, मनमोहनसिंह के हाथ उतने ही [...]
नवभारत टाइम्स, 08 फरवरी 2006 : जैसी कि आशंका थी, ईरान के मामले में भारत फिसल गया| न फिसलता तो आश्चर्य होता| हम फिसलने के लिए तैयार बैठे हैं, यह हमने पहले ही तय कर लिया था| अमेरिकी राजदूत डेविड मल्फोर्ड ने हमारी फिसलन पर पहले ही मुहर लगा दी थी| अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण [...]
कादम्बिनी, फरवरी 2006 : जो काम अगले सौ साल में भी संभव दिखाई नहीं पड़ता, वह अचानक होता हुआ दिख जाए तो क्या होगा? क्या हमें अपनी आंखों पर विश्वास होगा? ऐसा ही अजूबा हमने अंडमान-निकोबार में देखा| अंडमान-निकोबार भारत की मुख्यभूमि से लगभग तीन हजार किलोमीटर दूर है| हवाई जहाज का किराया 40 हजार [...]
टि्रब्यून, 06 फरवरी, 2006 : कर्नाटक में ह.डो. कुमारस्वामी का मुख्यमंत्री बनना भारतीय राजनीति की असाधारण घटना है| कर्नाटक का नाटक यद्यपि बेंगलूर में खेला गया है लेकिन उसकी प्रतिध्वनि सारे भारत में हुई है| कर्नाटक के नाटक को सारा भारत पिछले दो हफ्ते से एकटक देख रहा है| कर्नाटक ही नहीं, पूरे दक्षिण भारत [...]
नवभारत टाइम्स, 31 जनवरी 2006 : यों तो आज के भारत पर हमें गर्व होना चाहिए| आज जैसा भारत हम देख रहे हैं, वैसा साठ साल में हमने पहले कभी नहीं देखा| देश का राष्ट्रपति मुसलमान हो, प्रधानमंत्र्ी सिख हो, विपक्ष का नेता सिंधी हो, सत्तारूढ़ दल की नेता केथलिक हो और लोकसभा का अध्यक्ष [...]
राष्ट्रीय सहारा, 28 जनवरी 2006 : फलस्तीन के आम-चुनाव में ‘हमस’ की प्रचंड विजय विश्व-राजनीति की महत्वपूर्ण घटना है| फलस्तीन यों तो कोई स्वतंत्र् और संप्रभु राष्ट्र नहीं है| उसकी जनसंख्या और राष्ट्रीय सम्पदा भी नगण्य ही है लेकिन पश्चिम एशिया की राजनीति का वह बेरोमीटर है| फलस्तीन में जो कुछ होता है, उसका सीधा [...]
दैनिक भास्कर, 28 जनवरी 2006 : अमेरिका के राजदूत डेविड मल्फोर्ड ने मनमोहन-सरकार को साँसद में डाल दिया है| उन्होंने पी टी आई को भेंटवार्ता क्या दी, पूरे नेपथ्य का पर्दा ही हटा दिया है| भारत और अमेरिका के बीच अभी तक दबे-छिपे जो कुछ चल रहा था, वह सब उजागर हो गया है| लोगों [...]
राष्ट्रीय सहारा, 22 जनवरी 2006 : हर 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाएगा, यह घोषणा सरकार ने इतनी दबी जुबान से की है कि बहुत से हिंदी अखबारों को ही कुछ पता नहीं चला है हैदराबाद के प्रवासी सम्मेलन के दौरान सरकार को याद आया कि पहला विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर में 10 [...]
राष्ट्रीय सहारा, 22 जनवरी 2006 : भारत के सिर पर बोफोर्स का भूत कब तक नाचता रहेगा? क्या इसे दफन करने का वक्त नहीं आ गया है? जिस भूत ने राजीव सरकार और नेहरू परिवार की प्रतिष्ठा को दफन कर दिया, जिसने वी.पी. सिंह, देवगौड़ा, गुजराल और अटल सरकार को निकम्मा सिद्घ कर दिया, जिसने [...]
दैनिक भास्कर, 21 जनवरी 2006 : कर्नाटक से बढ़कर बुरी खबर काँग्रेस के लिए क्या हो सकती थी? वोल्कर रिपोर्ट और क्वात्रेची-प्रसंग के बादलों ने काँग्रेस की मलिका को पहले से घेर रखा था और अब कर्नाटक में वज्रपात हो गया| काँग्रेस को पता था कि देवगौड़ा उसकी सरकार गिराने पर आमादा हैं और वह [...]
दैनिक भास्कर, 12 जनवरी 2006 : ईरान ने अपनी परमाणु भट्टी दुबारा सुलगा ली है| उसने 30 माह पहले यूरोपीय देशों के आग्रह पर अपना यूरेनियम संवर्द्घन का कार्यक्रम बंद कर दिया था| उसका कहना है कि उसने अपनी मर्जी से यह कार्यक्रम बंद किया था और अब अपनी मर्जी से उसे वह चालू कर [...]
नवभारत टाइम्स, 12 जनवरी 2006 : वृंदा कारत ने किसका भला किया? न खुद का, न मजदूरों का, न देश का, न आयुर्वेद का, न मार्क्सवादी पार्टी का! हर दृष्टि से उनका अभियान गलत साबित हो रहा है| वृंदाजी ने पहले इतने सही मुद्दों पर लड़ाइयाँ लड़ी हैं कि जब उन्होंने स्वामी रामदेव के खिलाफ [...]
राष्ट्रीय सहारा, 6 जनवरी 2006 : नेपाल के माओवादियों ने फिर पुरानी राह पकड़ ली है| चार माह से चले आ रहे संघर्ष-विराम को उन्होंने समाप्त घोषित कर दिया है| उन्होंने न तो संयुक्तराष्ट्र, न नेपाल के राजनीतिक दलों और न ही भारत सरकार के अनुरोध को स्वीकार किया| वे अब मनमानी पर उतर आए [...]
जनसत्ता, 6 जनवरी 2006 : भाजपा के तीन प्रमुख संकट हैं| पहला नेतृत्व का, दूसरा विचारधारा का और तीसरा छवि का ! नए पार्टी-अध्यक्ष की नियुक्ति निर्विध्न हो गई, इसका मतलब यह नहीं कि नेतृत्व का संकट टल गया बल्कि वस्तुस्थिति यह है कि अब नेतृत्व का संकट बढ़ गया है| नए पार्टी-अध्यक्ष कितने स्वायत्त [...]
नवभारत टाइम्स, 02 जनवरी 2006 : कोई संसद अपने 11 सदस्यों को एक साथ निकाल बाहर करे, ऐसा पहले कभी देखा-सुना नहीं गया| निकालने में जो फुर्ती दिखाई गई, वह भी अपूर्व थी| अगर अदालत को मौका मिल जाता तो अंजाम शायद झारखंड रिश्वत कांड से भी बुरा हो सकता था| उस मामले में तो [...]