Posts Tagged '2009'

Posted by: on: December 25 2009 • Categorized in: Articles

रा. सहारा, 25 दिसंबर 2009 | कोपनहेगन में जो हुआ, क्या वाकई वह कोई समझौता है ? जैसे 1997 में क्योतो में 187 देशों ने एक दस्तावेज़ पर दस्तखत किए थे, वैसे ही 193 देशों ने कोपनहेगन में किसी समझौते पर दस्तखत किए हैं, क्या ? नहीं, कोपनहेगन में ऐसा कुछ नहीं हुआ| कोपनहेगन में [...]

Posted by: on: December 16 2009 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 16 Dec 2009 : भारत में गरीब होने का अर्थ जैसा है, वैसा शायद दुनिया में कहीं नही है| भारत में जिसकी आय 20 रू. से कम है, सिर्फ वही गरीब है| बाकी सब ? यदि सरकार और हमारे अर्थशास्त्रियों की मानें तो बाकी सब अमीर हैं| 25 रू. रोज़ से 25 लाख रू. रोज [...]

Posted by: on: December 11 2009 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 11 Dec 2009 : प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह की मास्को-यात्रा की तुलना यदि उनकी वाशिंगटन-यात्रा से और ओबामा की पेइचिंग-यात्रा  से कीजाए तो माना जाएगा कि यह मास्को-यात्रा अधिक सगुण और अधिक सार्थक रही है|  इस मास्को-यात्र का कोई खास शोर-शराबा नहीं था, जैसा कि उल्लिखत दोनों यात्रओं का था लेकिन इस यात्रा में से जैसे समझौते और दिशा-निर्देश निकले हैं, वे सिर्फ भारत-रूस संबंधों में ही [...]

Posted by: on: December 4 2009 • Categorized in: Articles

Dainik Hindustan, 04 Dec 2009 : ओबामा की नई अफगान-नीति में नया क्या है? उसमें ऐसा क्या है, जिसके कारण उसे बुश से अलग कहा जा सके? सिर्फ एक बात अलग है। वह यह कि अब से 18 माह बाद अफगानिस्तान से अमेरिकी फौजों की वापसी शुरू हो जाएगी। वापसी की बात कभी बुश के दिमाग में आईही नहीं। [...]

Posted by: on: December 1 2009 • Categorized in: Articles

Dainik Hindustan, 1 Dec 2009 : जस्टिस लिब्रहान ने जिन एक हजार पन्नों पर अपनी रपट लिखी है, वे बर्बाद हो गए। उन्हीं एक हजार पन्नों पर यदि छोटे बच्चों को क ख ग पढ़ाया जाता तो उनका कुछ बेहतर इस्तेमाल होता। यह कैसी रपट है कि बाबरी मस्जिद तोड़नेवाले एक भी कारसेवक पर वह [...]

Posted by: on: November 27 2009 • Categorized in: Articles

Dainik Hindustan, 27 Nov 2009 : प्रधानमंत्री डॉ़ मनमोहन सिंह की वाशिंगटन यात्रा के दौरान भारत-अमेरिका परमाणु करार को लागू करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, लेकिन क्या सिर्फ इसीलिए उनकी इस यात्रा को मात्र औपचारिकता मान लिया जाए? क्या यह मान लिया जाए कि ओबामा ने भारत के उन घावों पर सिर्फ मरहम लगाने [...]

Posted by: on: November 19 2009 • Categorized in: Articles

Dainik Hindustan, 19 Nov 2009 : बराक ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद मेरी यह तीसरी अमेरिका यात्रा है, इस यात्रा के दौरान मैंने जितनी चिंता अफगानिस्तान के बारे में देखी, पहले कभी नहीं देखी। पिछले कुछ समय से ओबामा-प्रशासन के अनेक अधिकारी, कुछ सीनेटर और कांग्रेसमैन, विदेशी राजदूतगण, और प्रोफेसर निरंतर पूछ रहे हैं [...]

Posted by: on: November 18 2009 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 18 Nov 2009 : अंतरिक्ष को लेकर आजकल सारी दुनिया में गहन विचार-विमर्श चल रहा है। वॉशिंगटन, डीसी में अमेरिका के अत्यंत प्रसिद्ध ‘थिंक टैंक’, सेंटर फॉर स्ट्रेटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज ने यहां विश्व सम्मेलन का आयोजन किया है, जिसमें चीन समेत अनेक राष्ट्रों के अंतरिक्ष विज्ञान के धुरंधर भाग ले रहे हैं। [...]

Posted by: on: November 16 2009 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 16 Nov 2009 : पिछले दो साल में मेरी यह चौथी अमेरिका यात्रा है। इस यात्रा में अमेरिका का जोहाल देख रहा हूं, उसे देखकर दुख होता है। मुझे लगता था कि बराक ओबामा के राष्ट्रपति बन जाने पर अमेरिका के दिन फिरेंगे। बुश की गल्तियां सुधारी जाएंगी, आम आदमी की जिंदगी बेहतर हो जाएगी, इराक [...]

Posted by: on: November 4 2009 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 4 Nov 2009 : आठ साल बीत गए लेकिन अफगानिस्तान में बाकायदा एक भी राजनीतिक दल नहीं बना है। स्वयं हामिद करजई का कोई दल नहीं है। दलों के बिना अफगानिस्तान की राजनीति दलदल में बदल गई है। संसद ठीक से नहीं चलती। जरूरी है कि हामिद करजई खुद पहल करें। यदि करजई दृढ़ता [...]

Posted by: on: October 30 2009 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा, 30 अक्टूबर 2009 : भारत की विदेश नीति तो बनाई जवाहरलाल नेहरू ने और चलाई कई प्रधानमंत्रियों ने लेकिन जैसे झंडे इंदिरा गांधी ने गाड़े, कोई और नहीं गाड़ सका| ऐसे चमत्कारी काम कभी-कभी सुसंयोग और अनुकूल परिस्थितियों के कारण भी हो जाते हैं लेकिन जिन कामों का यहां जिक्र किया जा रहा [...]

Posted by: on: October 24 2009 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 24 अक्टूबर 2009 :  राहुल गांधी वास्तव में गांधी नहीं हैं| वह हैं, राहुल-सोनिया या राहुल-राजीव या राहुल-इंदिरा या राहुल-नेहरू या राहुल-फिरोज गांधी ! गांधी से उनकी दूर-दूर तक कोई रिश्तेदारी नहीं है|  राहुल के दादा, जिन्हें हम गलती से फिरोज गांधी कहते हैं, वे अपना उपनाम ‘घंदी’ लिखा करते थे, जैसे कि [...]

Posted by: on: October 20 2009 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा, 20 अक्टूबर 2009 : ओबामा चाहते तो नोबेल पुरस्कार को अस्वीकार कर सकते थे, जैसे कि प्रसिद्घ फ्रांसीसी साहित्यकार ज्यां पाल सार्भ या वियतनामी बौद्घ भिक्षु थिच कुआंग दो ने कभी किया था| यदि वे ऐसा कर देते तो शायद उनकी हैसियत अमेरिका के राष्ट्रपति से भी ज्यादा हो जाती| अमेरिका के राष्ट्रपति-पद [...]

Posted by: on: October 14 2009 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 14 अक्टूबर 2009 : क्या यह आखिरी हमला है ? सवा साल में यह दूसरा हमला है| यदि हमारे काबुल के दूतावास पर किलेनुमा दीवारें खड़ी नहीं की जातीं तो इस बार पूरा दूतावास ही उड़ जाता| दूतावास तो हमने बचा लिया लेकिन क्या अफगानिस्तान में हम भारत को बचा पाएंगें ? भारत [...]

Posted by: on: October 13 2009 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा, 13 अक्टूबर 2009 : पाकिस्तान जैसी संकरी गली में अब फंसा है, पिछले 62 साल में पहले कभी नहीं फंसा| उसके मुंह में ऐसी मीठी गोली आ गई है, जिसे न वह उगल पा रहा है और न ही निगल पा रहा है| यह गोली है, डेढ़ बिलियन डॉलर की| लगभग साढ़े सात [...]

Posted by: on: October 8 2009 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 8 अक्टूबर 2009 : आखिर चीन ऐसा क्यों कर रहा है ? क्या कारण है कि वह हमारे कश्मीरी और अरूणाचली नागरिकों को वीज़ा वैसे नहीं दे रहा है, जैसे अन्य भारतीय नागरिकों को देता है? इन नागरिकों के पासपोर्टों पर वह वीज़ा नहीं छापता| उसका दूतावास इन नागरिकों को वीज़ा का एक [...]

Posted by: on: September 29 2009 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 29 सितंबर 2009 : दुनिया की अर्थ-व्यवस्था चलाने का ठेका कई वर्षों से पांच-सात देशों ने ले रखा था याने दुनिया में प्रच्छन्न साम्राज्यवाद चल रहा था लेकिन अब ग्रुप-20 याने 20 देशों के समूह ने यह जिम्मेदारी अपने सिर ले ली है| यह भी सीमित साम्राज्यवाद ही है, क्योंकि दुनिया में अभी [...]

Posted by: on: September 29 2009 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहरा, 29 सितंबर 09 : ऐसा कहा जा रहा है कि सुरक्षा-परिषद् के ताजातरीन प्रस्ताव का भारत-अमेरिकी परमाणु सौदे पर कोई असर नहीं पड़ेगा| प्रधानमंत्री को अमेरिकी नेताओं ने आश्वस्त कर दिया है और वे गद्गद् हैं| लेकिन इसमें गद्गद् होने की बात क्या है ? भारत को गद्गद् तो तब होना चाहिए, जब [...]

Posted by: on: September 27 2009 • Categorized in: Articles

दै. भास्कर, 27 सितंबर 2009 : चीन को लेकर भारत में अजीब-सी स्थिति पैदा हो गई है| ऐसा लगता है कि जनता जाग रही है और सरकार सो रही है| सीमा पर चीन क्या-क्या हरकतें कर रहा है, यह जानने के जितने साधन जनता के पास हैं, उनसे कहीं ज्यादा सरकार के पास हैं| जनता [...]

Posted by: on: September 23 2009 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 23 सितंबर 2009 : किसे सादगी कहे और किसे अय्याशी ? हवाई जहाज की ‘इकॉनामी क्लास’ में यात्रi को सादगी कहा जा रहा है| इन सादगीवालों से कोई पूछे कि हवाई-जहाज में कितने लोग यात्र करते हैं ? मुश्किल से दो-तीन करोड़ लोग ! 100 करोड़ से ज्यादा लोग तो हवाई जहाज को [...]

Slideshow