Posts Tagged '2011'

Posted by: on: October 13 2011 • Categorized in: Articles

Rashtriya Sahara, 13 Oct 2011 : लालकृष्ण आडवाणी की रथ-यात्रा को लेकर पता नहीं कौन-कौन परेशान हो रहा है? क्या कांग्रेस, क्या संघ-भाजपा, क्या कुछ मुस्लिम नेता और क्या कुछ क्षेत्रीय नेता ! सभी मिलकर 83 साल के इस चिर-युवा नेता की टांग-खिंचाई कर रहे हैं। इन परेशान होनेवाले महानुभावों से कोई पूछे कि भ्रष्टाचार-विरोधी [...]

Posted by: on: October 12 2011 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 12 Oct 2011: अन्ना टीम के लोगों ने जब से हिसार पर मुंह खोलना शुरू किया है, कई तात्कालिक और मूलभूत सवाल उठ खड़े हुए हैं। जैसे यह कि हिसार के उप-चुनावी दंगल में सीधे कूदकर क्या उन्होंने ठीक किया और यह मूलभूत प्रश्न भी कि क्या यह आंदोलन सिर्फ कागजी पुलाव बनकर [...]

Posted by: on: October 4 2011 • Categorized in: Articles

Naya India, 04 Oct 2011 : भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में से क्या निकला, यह बताना भाजपा के नेताओं के लिए भी मुश्किल है। देश को आशा थी कि यह दिल्ली बैठक बड़ी जानदार सिद्ध होगी लेकिन वह होती, उसके पहले ही उसका दम निकल गया। बैठक के आरंभ से अंत तक नरेंद्र मोदी उस [...]

Posted by: on: September 29 2011 • Categorized in: Articles

Naya India, 29 sept 2011 : फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कबूतरों के पिंजरे में बिल्ली छोड़ दी है। उन्होंने वह काम कर दिखाया है, जो यासर अराफात जैसे चमत्कारी नेता भी नहीं कर सके। अब्बास ने संयुक्तराष्ट्र महासचिव बान-की-मून को एक औपचारिक अर्जी दे दी है और फलस्तीन को पूर्ण सदस्य बनाने का [...]

Posted by: on: September 28 2011 • Categorized in: Articles

Naya India, 30 Sept 2011 : अमेरिका और पाकिस्तान का एक-दूसरे से जैसा मोह-भंग आजकल हुआ है, पहले कभी नहीं हुआ। सीटो और सेन्टो नामक सैन्य-गुटों में शामिल होने के बाद दोनों देशों के संबंधों में कई बार छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव तो आए लेकिन इस बार झटका इतना तगड़ा है कि दोनों का गठबंधन टूट सकता [...]

Posted by: on: September 25 2011 • Categorized in: Articles

नया इंडिया, 25 Sept 2011 : अगर किसी की गरीबी तय करने का पैमाना सिर्फ यही है कि वह रोज़ाना कितना खर्च करता है तो हमारे देश में सबसे ज्यादा गरीब तो नेता लोग ही होंगे, क्योंकि उन्हें तो कुछ खर्च करना ही नहीं पड़ता है। माले-मुफ्त और दिले-बेरहम! उन्हें हर चीज़ लगभग मुफ्त मिलती है। [...]

Posted by: on: September 14 2011 • Categorized in: Articles

14 Sept 2011 : संयुक्तराष्ट्र संघ में अगर अब भी हिंदी नहीं आएगी तो कब आएगी ? हिंदी का समय तो आ चुका है लेकिन अभी उसे एक हल्के-से धक्के की जरूरत है| भारत सरकार को कोई लंबा चौड़ा खर्च नहीं करना है, उसे किसी विश्व अदालत में हिंदी का मुकदमा नहीं लड़ना है, कोई [...]

Posted by: on: September 14 2011 • Categorized in: Articles

नया इंडिया, 14 सितंबर 2011 : एहसान जाफरी के मामले में उच्चतम न्यायालय ने जो निर्णय किया है, उस पर कांग्रेस और भाजपा दोनों की प्रतिकि्रया सही मालूम पड़ती हैं| कांग्रेस का यह कहना सही है कि उच्चतम न्यायालय ने नरेन्द्र मोदी और उनके साथियों को दोषमुक्त घोषित नहीं किया है| अब सारे मामले पर [...]

Posted by: on: September 14 2011 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 14 Sept. 2011 :   संयुक्तराष्ट्र संघ में अगर अब भी हिंदी नहीं आएगी तो कब आएगी ? हिंदी का समय तो आ चुका है लेकिन अभी उसे एक हल्के-से धक्के की जरूरत है| भारत सरकार को कोई लंबा चौड़ा खर्च नहीं करना है, उसे किसी विश्व अदालत में हिंदी का मुकदमा नहीं लड़ना [...]

Posted by: on: September 9 2011 • Categorized in: Articles

नया इंडिया, 9 सितंबर 2011 : अंतरराष्ट्रीय राजनीति के इतिहास में भारत और बांग्लादेश के संबंध एकदम अनूठे रहे हैं| दुनिया में ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं जबकि कोई राष्ट्र अपने पड़ौस में एक नए राष्ट्र को जन्म दे दे और उस पर कोई अहसान नहीं जताए या उसके साथ दादागीरी न करे| बांग्लादेश [...]

Posted by: on: September 8 2011 • Categorized in: Articles

दिल्ली उच्च न्यायालय के पास हुए विस्फोट ने एक बार फिर भारत की दुखती रग पर उंगली रख दी है| संसद या उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय कोई साधारण बाजार या भीड़भरे रेल्वे स्टेशन नहीं हैं| ये भारतीय राष्ट्र-राज्य के स्नायु-केंद्र हैं| अगर इन स्थानों की रक्षा करने में भी हम असमर्थ हैं तो भारत [...]

Posted by: on: September 7 2011 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 07 Sept. 2011 : इधर रामलीला मैदान में अन्ना हजारे का अनशन अंतिम दौर में था, उधर कांग्रेस पार्टी ने गुजरात में नहले पर दहला मारने की कोशिश की। उसने वहां नए लोकायुक्त की नियुक्ति करवा दी। अन्ना हजारे को उसने संदेश दिया कि तुम तो सिर्फ बात करते हो, लोकपाल और लोकायुक्त [...]

Posted by: on: August 24 2011 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 24 Aug 2011 : लीबिया के तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफी अभी तक पकड़े नहीं गए हैं और उनके भागने की भी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पश्चिमी राष्ट्रों के नेताओं ने अपनी पीठ खुद ठोकनी शुरू कर दी है। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तो गद्दाफी के पतन की घोषणा कर दी [...]

Posted by: on: August 23 2011 • Categorized in: Articles

23 अगस्त 2011 : अन्ना हजारे के अनशन ने सरकार को सांसत में डाल दिया है| यदि वह सरकारी लोकपाल बिल को वापिस लेती है और उसकी जगह जन-लोकपाल बिल पेश करती है तो माना जाएगा कि उसने संसद की गरिमा गिरा दी है, क्योंकि उसे प्रवक्ता अभी तक यही तर्क दे रहे थे कि [...]

Posted by: on: August 17 2011 • Categorized in: Articles

दैनिक भास्कर, 17 अगस्त 2011 : प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से कोई यह आशा नहीं करता कि वे जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी या अटल बिहारी वाजपेयी की तरह लालकिले से कोई ओजस्वी या प्रेरणादायक भाषण देंगे| वे जन नेता नहीं हैं| वे नेता भी नहीं हैं, लेकिन जो व्यक्ति सात बार लालकिले से राष्ट्र को [...]

Posted by: on: August 10 2011 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 10 Aug 2011 : ऐसा नहीं है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी हेलिकॉप्टर पहली बार गिरा है। इसके पहले भी नाटो फौजों के कई हेलिकॉप्टर गिर चुके हैं, लेकिन पिछले शुक्रवार को वरदक प्रांत में जो हेलिकॉप्टर गिरा है, उसने नाटो सेनाओं को हिला दिया है। पहली बार उसके 31 सिपाही एक साथ मारे [...]

Posted by: on: August 4 2011 • Categorized in: Articles

Sahara Samay, 04 Aug 2011 : अपने यहां कहावत है कि ‘जाके पैर न फटे बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई’! चीन अब तक भारत की शिकायतों पर आंख मूंदे बैठा रहता था. उसे पाकिस्तान की आतंकवादी भूमिका कभी आपत्तिजनक नहीं दिखाई पड़ती थी. वह जान बूझकर मक्खी निगल रहा था लेकिन अब काशगर में हुए [...]

Posted by: on: August 3 2011 • Categorized in: Articles

Dainik Bhaskar, 03 Aug 2011 : नए विदेश सचिव रंजन मथाई के इस संकल्प का स्वागत किया जाना चाहिए कि विदेश नीति में उनकी प्राथमिकता भारत के पड़ौसियों पर रहेगी। यही प्राथमिकता पिछले दो-तीन विदेश सचिवों की भी रही है लेकिन क्या कारण है कि पड़ौसी राष्ट्रों पर इतना ध्यान देने के बावजूद भारत की गाड़ी [...]

Posted by: on: August 1 2011 • Categorized in: Articles

Hindustan, 01 Aug 2011: पाकिस्तान की नई विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार की भारत-यात्रा से किसी चमत्कारी परिणाम की उम्मीद होती तो खुद आसिफ-ज़रदारी या युसुफ रज़ा गिलानी भारत न आ जाते ? वे नई-नवेली विदेष मंत्री को यह श्रेय क्यों लेने देते। दोनों पक्षों को पता था कि इस यात्रा के परिणाम सीमित होंगे [...]

Posted by: on: July 28 2011 • Categorized in: Articles

राष्ट्रीय सहारा, 28 July 2011 : मौलाना गुलाम मुहम्मद वस्तानवी को दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम के पद से हटाए जाने का असली अर्थ क्या है? इसे कुछ लोग धर्मनिरपेक्षता की हार बता रहे हैं तो कुछ मुस्लिम कट्टरपंथ की जीत कह रहे हैं और कुछ यह भी मान रहे हैं कि देवबंद के इस्लामी मदरसे से [...]

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